चंडीगढ़: पंजाब में जारी SIR (Special Intensive Revision) की ड्राफ्ट मतदाता सूची में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम नहीं मिलने के बाद सियासी विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे को लेकर राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। अब मामले में चुनाव आयोग (EC) ने भी संज्ञान लिया है।चुनाव आयोग ने पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) से इस पूरे मामले पर जवाब मांगा है। आयोग ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि आखिर राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची से किस प्रक्रिया के तहत हटकर ‘शिफ्टेड’ के तौर पर दर्ज हुआ।
चुनाव आयोग ने पंजाब CEO से मांगी पूरी जानकारी
मामले को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने पंजाब CEO से इस संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी है। आयोग यह जानना चाहता है कि राघव चड्ढा का नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल क्यों नहीं हुआ और उन्हें ‘शिफ्टेड’ श्रेणी में किस आधार पर रखा गया। हालांकि, इस बीच राघव चड्ढा के लिए राहत की खबर भी सामने आई है। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान राघव चड्ढा का नाम जरूरी दस्तावेजों के साथ मतदाता सूची में जोड़ा जा सकता है। पंजाब की फाइनल मतदाता सूची 12 अक्टूबर 2026 को जारी की जानी है।
राघव चड्ढा ने लगाया राजनीतिक बदले का आरोप
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से अपना नाम गायब होने के बाद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं और उनका वोटर आईडी मोहाली में पंजीकृत है। इसके बावजूद ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनके नाम के सामने उन्हें ‘शिफ्टेड’ बताया गया है। राघव चड्ढा ने कहा कि राहत की बात यह है कि अभी यह ड्राफ्ट मतदाता सूची है और अंतिम सूची जारी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि दावे और आपत्तियों के दौरान नाम और विवरण में सुधार की प्रक्रिया चलती है तथा अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर 2026 में प्रकाशित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह SIR की गाइडलाइंस के तहत उपलब्ध प्रक्रिया का इस्तेमाल कर रहे हैं।
‘मुझे शिफ्टेड किसने चिह्नित किया?’
राघव चड्ढा ने इस पूरे मामले को महज प्रशासनिक या लिपिकीय गलती मानने पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें ‘शिफ्टेड’ के रूप में चिह्नित करने से लेकर इसे सत्यापित और आगे बढ़ाने तक की प्रक्रिया में पंजाब सरकार के अधिकारी शामिल रहे हैं।
उनका सवाल था कि उन्हें ‘शिफ्टेड’ किसने चिह्नित किया और इस वर्गीकरण का सत्यापन किस स्तर पर हुआ। उन्होंने दावा किया कि इन सभी प्रक्रियाओं में पंजाब सरकार के अधिकारियों की भूमिका रहती है।
सरकारी अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव का आरोप
राघव चड्ढा ने चुनावी प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से लेकर Assistant Electoral Registration Officer (AERO), Electoral Registration Officer (ERO) और District Election Officer (DEO) तक अलग-अलग स्तरों पर सरकारी अधिकारी चुनावी प्रक्रिया से जुड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी ड्यूटी खत्म होने के बाद इन अधिकारियों के ट्रांसफर, पोस्टिंग और करियर से जुड़े फैसले सरकार के नियंत्रण में होते हैं। इसी आधार पर उन्होंने दावा किया कि सरकारी मशीनरी के जरिए राजनीतिक दबाव बनाया जा सकता है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना बाकी है।
AAP छोड़ने के बाद से लगाया निशाना बनाने का आरोप
राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद से उसके नेतृत्व में उनके प्रति नाराजगी है और पंजाब पुलिस तथा प्रशासनिक मशीनरी के जरिए उनके जैसे नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि AAP छोड़कर भाजपा में शामिल हुए अन्य सांसदों को भी पंजाब सरकार की ओर से निशाना बनाया गया है। राघव चड्ढा ने SIR की ड्राफ्ट सूची में अपने नाम की स्थिति को इसी कथित राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देखा।
SIR गाइडलाइन का दिया हवाला
राघव चड्ढा ने अपने पक्ष में चुनाव आयोग की SIR गाइडलाइन के पैराग्राफ 4(D) का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक इसमें जनप्रतिनिधियों समेत कुछ विशेष श्रेणी के लोगों के नामों को ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल करने की व्यवस्था का उल्लेख है। उनका कहना है कि इस श्रेणी में न्यायपालिका के सदस्य, सांसद, विधायक और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सार्वजनिक जीवन के लोग शामिल हैं, जिनके नाम पहले से मतदाता डेटाबेस में चिह्नित हैं। राघव चड्ढा ने तर्क दिया कि वह पंजाब से मौजूदा सांसद हैं, इसलिए उनके अनुसार उनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मामले में इस प्रावधान का पालन नहीं किया गया।
अब चुनाव आयोग की जांच पर नजर
राघव चड्ढा के नाम को लेकर उठे विवाद के बीच अब चुनाव आयोग द्वारा पंजाब CEO से जवाब मांगे जाने के बाद मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। फिलहाल यह देखना होगा कि पंजाब CEO की रिपोर्ट में नाम हटने की वजह क्या बताई जाती है और दावे-आपत्ति की प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची में राघव चड्ढा का नाम किस स्थिति में शामिल होता है।