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Drug Smuggling Case: गुप्त चेंबर से मिला था 110 किलो गांजा, चार दोषियों पर 1-1 लाख का जुर्माना

Drug Smuggling Case: गुप्त चेंबर से मिला था 110 किलो गांजा, चार दोषियों पर 1-1 लाख का जुर्माना

कोण्डागांव। छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले में चर्चित 110.570 किलो गांजा तस्करी मामले में विशेष न्यायालय ने कड़ा फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने फरसगांव निवासी कथित सरगना सहित सभी चार दोषियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और एक-एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यदि जुर्माना जमा नहीं किया जाता है तो प्रत्येक दोषी को अतिरिक्त एक वर्ष का सश्रम कारावास भुगतना होगा। यह फैसला जिले में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कानूनी कार्रवाई माना जा रहा है और इससे ऐसे अपराधों पर कड़ा संदेश गया है।

वाहन जांच के दौरान गुप्त चेंबर से बरामद हुआ था 110.570 किलो गांजा

अभियोजन के अनुसार, 26 मई 2024 को तत्कालीन एसडीओपी अनिल कुमार विश्वकर्मा और थाना प्रभारी नरेश साहू के नेतृत्व में फरसगांव पुलिस एनएच-30 स्थित बिजली कार्यालय के सामने वाहन जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान CG 04 JC 9732 नंबर के 10 चक्का ट्रक को रोककर उसकी तलाशी ली गई। जांच के दौरान ट्रक के केबिन और डाला के बीच विशेष रूप से बनाए गए गुप्त चेंबर से 110.570 किलोग्राम अवैध गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने मौके से चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। इस कार्रवाई से अंतरराज्यीय गांजा तस्करी नेटवर्क का भी खुलासा हुआ था।

दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आया फैसला

मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय (स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985) कोण्डागांव में हुई। विशेष न्यायाधीश खिलावन राम रिगरी ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्य, जब्ती पंचनामा, गवाहों के बयान और अन्य प्रमाणों का परीक्षण करने के बाद चारों आरोपियों को दोषी करार दिया।

चारों दोषियों को मिली 10-10 साल की सजा

न्यायालय ने निम्न आरोपियों को एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी)(ii)(सी) के तहत सुब्रत राय उर्फ सुबो (फरसगांव, कोण्डागांव), सतीश चन्द्र प्रजापति (हाथरस, उत्तर प्रदेश), शुभम सिंह पटेल (चित्रकूट, उत्तर प्रदेश), परमेश्वर खीला (मलकानगिरी, ओडिशा) को दोषी ठहराया गया है, सभी दोषियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास तथा एक-एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में प्रत्येक को अतिरिक्त एक वर्ष की सजा भुगतनी होगी।

पुलिस विवेचना और अभियोजन की प्रभावी पैरवी रही अहम

इस मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रूकमणी मरकाम ने प्रभावी पैरवी की। वहीं लोक अभियोजक हेमंत गोस्वामी ने बताया कि फरसगांव पुलिस की मजबूत विवेचना, समयबद्ध कार्रवाई और अभियोजन द्वारा प्रस्तुत ठोस साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। यह निर्णय प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध कानून के सख्त रुख को दर्शाता है।
 
 
 

 


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