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मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव पर कानूनी घमासान: मीनाक्षी नटराजन केस में सुप्रीम कोर्ट आज तय करेगा आगे की दिशा

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव पर कानूनी घमासान: मीनाक्षी नटराजन केस में सुप्रीम कोर्ट आज तय करेगा आगे की दिशा

दिल्ली। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव से जुड़ा मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने का मामला अब न्यायपालिका की चौखट तक पहुंच चुका है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीनों उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित हो गई थी। अब इस पूरे मामले की सुनवाई आज सुप्रीम कोर्ट में होने जा रही है, जिस पर राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हुई हैं।मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए भाजपा उम्मीदवार तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं। कांग्रेस का दावा है कि यदि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन स्वीकार किया जाता, तो चुनावी मुकाबला होता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूती मिलती।

कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि नामांकन रद्द करने का फैसला निष्पक्ष नहीं था और इसे राजनीतिक दबाव में लिया गया। पार्टी का कहना है कि 10 जून को ही केंद्रीय चुनाव आयोग को शिकायत सौंप दी गई थी, लेकिन चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक आयोग की ओर से कोई ठोस हस्तक्षेप नहीं किया गया कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग ने समय रहते मामले पर कार्रवाई नहीं की, जिससे भाजपा उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया।

राहुल गांधी और खड़गे ने साधा निशाना

दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की मौजूदगी में हुई बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। कांग्रेस नेतृत्व ने चुनाव आयोग और भाजपा दोनों की भूमिका पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा और चुनाव आयोग की "मिलीभगत" के कारण एक राज्यसभा सीट कांग्रेस से छीन ली गई। पार्टी का दावा है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पर्याप्त कानूनी आधार के बिना खारिज किया गया और रिटर्निंग अधिकारी का फैसला पक्षपातपूर्ण था।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी निगाहें

अब इस पूरे विवाद में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत यह तय करेगी कि नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं। यदि कोर्ट को किसी प्रकार की अनियमितता दिखाई देती है तो मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक उम्मीदवार के नामांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता से भी जुड़ा हुआ है।


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