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TMC के 19 बागी सांसदों के नाम आए सामने: शत्रुघ्न सिन्हा, सयानी घोष और युसूफ पठान जैसे दिग्गज शामिल...

TMC के 19 बागी सांसदों के नाम आए सामने: शत्रुघ्न सिन्हा, सयानी घोष और युसूफ पठान जैसे दिग्गज शामिल...

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी असंतोष की खबरों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। पार्टी के 19 सांसदों के एक अलग गुट के साथ खड़े होने की चर्चा के बीच तृणमूल नेतृत्व ने मोर्चा संभाल लिया है। बताया जा रहा है कि कुछ सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है, जिसके बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

कई बड़े चेहरों के नाम चर्चा में

बागी खेमे से जुड़े जिन सांसदों के नाम सामने आए हैं, उनमें पार्टी के कई चर्चित और प्रभावशाली चेहरे शामिल बताए जा रहे हैं। इन सांसदों की पहचान अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत जनाधार वाले नेताओं के रूप में रही है। यही वजह है कि इस घटनाक्रम को तृणमूल कांग्रेस के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है।

TMC नेताओं ने जताई नाराजगी

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने बागी सांसदों के रुख पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी सांसद को पार्टी की नीतियों या नेतृत्व से असहमति है, तो उसे स्पष्ट रूप से जनता और कार्यकर्ताओं के सामने अपनी स्थिति रखनी चाहिए। नेताओं ने आरोप लगाया कि कुछ सांसद पर्दे के पीछे राजनीतिक सौदेबाजी में लगे हुए हैं।

भाजपा से संपर्क को लेकर उठे सवाल

तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने दावा किया है कि बागी सांसदों की हालिया गतिविधियां भाजपा के साथ उनकी नजदीकियों की ओर संकेत करती हैं। पार्टी का आरोप है कि कुछ नेताओं ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की है, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

कथित पत्र पर भी विवाद

बागी गुट द्वारा लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए कथित पत्र को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल नेताओं का कहना है कि यदि ऐसा कोई पत्र वास्तव में मौजूद है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। पार्टी का मानना है कि बिना आधिकारिक दस्तावेज सामने आए दावों की सत्यता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी है पार्टी

टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि पार्टी की असली ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता हैं और वे अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व में एकजुट हैं। नेताओं ने दावा किया कि कुछ सांसदों के अलग रुख अपनाने से संगठन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा और पार्टी अपनी राजनीतिक लड़ाई पहले की तरह मजबूती से जारी रखेगी।

बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल

इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बागी सांसदों की संख्या और बढ़ती है तो इसका असर राज्य और राष्ट्रीय राजनीति दोनों पर पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर बागी गुट के अगले कदम और तृणमूल कांग्रेस की रणनीति पर टिकी हुई है।


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