दतिया: मध्य प्रदेश की चर्चित दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों का इंतजार सोमवार सुबह खत्म होने लगा। सुबह 8 बजे से मतगणना केंद्र पर डाक मतपत्रों (पोस्टल बैलेट) की गिनती शुरू हो गई है। शुरुआती रुझान कुछ ही देर में सामने आने की उम्मीद है। इस सीट पर कुल 15 राउंड में मतगणना पूरी होगी, जिसके बाद विजेता का ऐलान किया जाएगा। दतिया उपचुनाव इस बार केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे मध्य प्रदेश की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव मैदान में कुल 21 प्रत्याशी हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह के बीच माना जा रहा है। इसके अलावा आजाद समाज पार्टी के दामोदर सिंह यादव सहित अन्य उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
71.44 प्रतिशत मतदान ने बढ़ाया मुकाबले का रोमांच
30 जुलाई को हुए मतदान में मतदाताओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया था। निर्वाचन आयोग के अनुसार, दतिया विधानसभा क्षेत्र में 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। कुल 2,20,410 मतदाताओं में से 1,57,473 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतगणना की शुरुआत टेबल नंबर-21 पर रखे गए 451 पोस्टल बैलेट की गिनती से हुई है। इसके बाद ईवीएम के मतों की गिनती शुरू होगी।
क्यों हुआ दतिया में उपचुनाव?
दतिया सीट पर उपचुनाव इसलिए कराना पड़ा क्योंकि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में निर्वाचित कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त हो गई थी। अप्रैल 2026 में दिल्ली की एक अदालत द्वारा एक धोखाधड़ी मामले में तीन वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई, जिसके चलते निर्वाचन आयोग ने यहां उपचुनाव कराया।
बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दतिया का परिणाम केवल एक सीट का फैसला नहीं होगा, बल्कि प्रदेश की राजनीति पर भी इसका असर दिखाई देगा। विश्लेषकों के अनुसार, यदि भाजपा जीत दर्ज करती है तो यह मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व और प्रदेश संगठन के लिए सकारात्मक संदेश माना जाएगा। वहीं कांग्रेस की जीत से प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का संगठनात्मक कद मजबूत हो सकता है। यह चुनाव प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में पहली बड़ी चुनावी परीक्षा भी माना जा रहा है।
स्थानीय मुद्दों के साथ राजनीतिक संदेश भी अहम
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दतिया उपचुनाव में स्थानीय विकास, संगठन की सक्रियता और मतदाताओं की नाराजगी जैसे मुद्दों के साथ हाल के सामाजिक और राजनीतिक घटनाक्रमों का भी असर देखने को मिल सकता है। इसलिए इस चुनाव के नतीजों पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।