रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) द्वारा बोर्ड परीक्षाओं और अन्य शैक्षणिक सेवाओं के शुल्क में की गई वृद्धि को लेकर प्रदेश में राजनीतिक प्रतिक्रिया शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता एवं कांग्रेस नेता विकास बजाज ने शुल्क वृद्धि का विरोध करते हुए इसे छात्रों, बेरोजगार युवाओं और उनके अभिभावकों के लिए आर्थिक बोझ बताया है। विकास बजाज ने कहा कि राज्य में पहले से ही महंगाई का दबाव बना हुआ है। ऐसे समय में शिक्षा से जुड़े शुल्कों में बड़ी बढ़ोतरी करना आम परिवारों के हित में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में शुल्क बढ़ाकर युवाओं पर अतिरिक्त वित्तीय भार डाला जा रहा है।
10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा शुल्क में बढ़ोतरी
कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि की है। उन्होंने बताया कि नियमित विद्यार्थियों को अब बोर्ड परीक्षा, अंकसूची और प्रायोगिक परीक्षा शुल्क सहित कुल 800 रुपये का भुगतान करना होगा, जबकि पहले यह राशि 460 रुपये थी। इसके अलावा बोर्ड परीक्षा आवेदन फॉर्म शुल्क भी बढ़ाया गया है। पहले जहां आवेदन शुल्क 80 रुपये था, उसे बढ़ाकर 150 रुपये कर दिया गया है। कांग्रेस का दावा है कि विभिन्न मदों में शुल्क वृद्धि से छात्रों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा।
22 मदों में शुल्क बढ़ाने का आरोप
विकास बजाज ने कहा कि माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा लगभग 22 विभिन्न मदों में शुल्क बढ़ाने को मंजूरी दी गई है। इनमें नामांकन शुल्क, अतिरिक्त विषय शुल्क, द्वितीय मुख्य परीक्षा, अवसर परीक्षा, स्वाध्यायी विद्यार्थियों के पंजीयन एवं अनुमति शुल्क सहित अन्य कई शुल्क शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए और छात्रों के हित में शुल्क वृद्धि को वापस लेना चाहिए।
सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि महंगाई, बिजली दरों और अन्य खर्चों में बढ़ोतरी के बीच शिक्षा शुल्क में वृद्धि आम लोगों की मुश्किलें बढ़ाने वाली है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए, न कि उन पर अतिरिक्त आर्थिक भार डालना।
शुल्क वृद्धि वापस लेने की मांग
विकास बजाज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार से अपील करते हुए कहा कि बोर्ड परीक्षा एवं अन्य शैक्षणिक शुल्कों में की गई वृद्धि पर पुनर्विचार किया जाए और छात्रों व अभिभावकों को राहत देने के लिए निर्णय वापस लिया जाए।