MLA Arif Masood Controversy : सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम अनिवार्य किए जाने को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के बीच इस मुद्दे पर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है।
आरिफ मसूद का बयान
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने अपने एक बयान में कहा है कि उन्होंने अभी तक संबंधित आदेश नहीं देखा है। आदेश का अध्ययन करने के बाद ही वे इस पर स्पष्ट प्रतिक्रिया देंगे। उन्होंने कहा कि पहले भी कुछ प्रावधानों पर आपत्ति रही है, इसलिए यह देखना जरूरी है कि क्या संशोधन हुए हैं और क्या लागू किया गया है। मसूद ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी है और यह बात देश जानता है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उस दौर में भाजपा उनके साथ नहीं थी।
अपनी ही पार्टी को नसीहत
बुरहानपुर में आयोजित आमसभा के दौरान आरिफ मसूद ने अपनी ही पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि जो नेता घर बैठकर राजनीति कर रहे हैं और आंदोलनों में शामिल नहीं हो रहे, उन्हें समझना चाहिए कि यह नई दौर की कांग्रेस है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग पार्टी को कमजोर करेंगे, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। मसूद ने कार्यकर्ताओं से कहा कि सिर्फ वोट के पीछे न भागें, बल्कि लोगों को जोड़ने का काम करें।
भाजपा का पलटवार
वहीं भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के कारण ही पहले वंदे मातरम अनिवार्य नहीं हो पाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम के मूल स्वरूप को छोटा किया और इसकी अनिवार्यता को समाप्त किया। इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।