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छत्तीसगढ़ नक्सली सरेंडर वेरिफिकेशन: आत्मसमर्पण करने वालों की होगी जांच, फर्जी मामलों पर लगेगी रोक

छत्तीसगढ़ नक्सली सरेंडर वेरिफिकेशन: आत्मसमर्पण करने वालों की होगी जांच, फर्जी मामलों पर लगेगी रोक

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता के बाद अब राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के सत्यापन (Verification) की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वास्तव में सरेंडर करने वाले लोग सही हैं और उन्हें ही पुनर्वास योजनाओं का लाभ मिले।

राज्य सरकार के इस फैसले के तहत अब नक्सल प्रभावित जिलों के पुलिस अधीक्षक (SP) को विशेष अधिकार दिए गए हैं। वे आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की पूरी जानकारी जुटाकर उसका रिकॉर्ड तैयार करेंगे और उसे अपडेट भी करेंगे।

नक्सल मुक्त घोषणा के बाद सरकार का बड़ा फैसला

मार्च 2026 में छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है। हालांकि इससे पहले राज्यभर में करीब 2700 से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। अब सरकार चाहती है कि इन सभी मामलों की सही तरीके से जांच हो, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

केंद्र सरकार के निर्देशों पर लिया गया निर्णय

राज्य सरकार का यह फैसला केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप लिया गया है। गृह मंत्रालय द्वारा वर्ष 2013 और 2022 में जारी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि कोई भी नक्सली जिला मजिस्ट्रेट, एसपी या अन्य अधिकृत अधिकारी के सामने आत्मसमर्पण कर सकता है।

इसी नीति के तहत अब जिला स्तर पर पुलिस अधीक्षकों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे समर्पण करने वाले नक्सलियों की जानकारी का सत्यापन करें और उसका पूरा रिकॉर्ड तैयार करें।

समर्पित नक्सलियों के पिछले जीवन की होगी जांच

इस नई व्यवस्था के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पूर्ववृत्त (Background) की विस्तृत जांच की जाएगी।

उनके पिछले गतिविधियों का रिकॉर्ड तैयार होगा
दिए गए विवरण को निर्धारित फॉर्मेट में भरा जाएगा
संबंधित एजेंसियों से जानकारी का मिलान किया जाएगा

इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह है कि कोई भी व्यक्ति गलत तरीके से आत्मसमर्पण का दावा कर सरकारी लाभ न ले सके।

फर्जी आत्मसमर्पण पर लगेगी लगाम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम फर्जी आत्मसमर्पण (Fake Surrender) की घटनाओं को रोकने में काफी मददगार साबित होगा।

पहले कई मामलों में ऐसे आरोप सामने आए थे कि कुछ लोग बिना नक्सली गतिविधियों से जुड़े हुए भी आत्मसमर्पण का फायदा लेने की कोशिश करते हैं। अब सत्यापन प्रक्रिया से ऐसे मामलों पर सख्ती से रोक लगाई जा सकेगी।

तीन साल में 2700 से ज्यादा नक्सलियों ने किया सरेंडर

छत्तीसगढ़ में पिछले तीन वर्षों में नक्सलियों के आत्मसमर्पण में तेजी आई है।

जनवरी 2024 से मार्च 2026 तक: 2,714 नक्सलियों ने सरेंडर किया
बस्तर संभाग में: 2,625 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया
2024 में: 881 नक्सली सरेंडर
2025 में: करीब 1,973 (अक्टूबर तक)

ये आंकड़े बताते हैं कि सरकार की नीतियों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई का असर जमीन पर दिख रहा है।

बड़े नक्सली नेता और महिलाएं भी शामिल

आत्मसमर्पण करने वालों में सिर्फ छोटे कैडर ही नहीं, बल्कि बड़े नक्सली नेता भी शामिल रहे हैं।

मार्च 2026 में एक बड़े सरेंडर में:

6 डिवीजनल कमेटी सदस्य (8-8 लाख इनाम)
3 प्लाटून कमांडर
18 प्लाटून सदस्य
23 एरिया कमेटी सदस्य
56 सामान्य सदस्य

वहीं महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है। एक घटना में 15 में से 9 महिलाएं शामिल थीं।

इसके अलावा 2025 तक कई बड़े इनामी नक्सली भी मुख्यधारा में लौटे, जिनमें एक पर 1 करोड़ रुपये का इनाम भी घोषित था।


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