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10 अगस्त से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लागू होगा नया न्यायिक रोस्टर, बेंचों के बीच मामलों का नया बंटवारा

10 अगस्त से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लागू होगा नया न्यायिक रोस्टर, बेंचों के बीच मामलों का नया बंटवारा

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 10 अगस्त 2026 से नई न्यायिक रोस्टर व्यवस्था लागू होने जा रही है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने 4 अगस्त को नया रोस्टर जारी किया है, जिसके तहत विभिन्न प्रकार के मामलों का विषयवार और वर्षवार विभाजन अलग-अलग डिविजन और सिंगल बेंचों के बीच किया गया है। यह व्यवस्था अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।

डिविजन बेंचों को मिली अलग-अलग मामलों की जिम्मेदारी

नई व्यवस्था के तहत डिविजन बेंच-1, जिसमें मुख्य न्यायाधीश और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल शामिल हैं, जनहित याचिकाओं (PIL), रिट अपील, हेबियस कॉर्पस, आपराधिक अपील और अन्य महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों की सुनवाई करेगी।

डिविजन बेंच-2 को आपराधिक मामलों के साथ वर्ष 2022 तक के अल्ट्रा वायर्स मामलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बेंच में जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल शामिल हैं।

वहीं डिविजन बेंच-3 वर्ष 2016 से आगे के बरी (Acquittal) संबंधी मामलों की अपीलों की सुनवाई करेगी, जबकि डिविजन बेंच-4 सिविल, कंपनी, टैक्स, वैवाहिक विवाद और अन्य दीवानी अपीलों की सुनवाई करेगी।

चीफ जस्टिस की विशेष सिंगल बेंच करेगी इन मामलों की सुनवाई

नई रोस्टर व्यवस्था में सिंगल बेंचों के लिए भी मामलों का विस्तृत आवंटन किया गया है। मुख्य न्यायाधीश की विशेष सिंगल बेंच को जमानत आवेदन, आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाएं, ट्रांसफर आवेदन और अन्य विशेष मामलों की सुनवाई का दायित्व दिया गया है।

इसके अलावा अन्य सिंगल बेंचों को सेवा संबंधी याचिकाएं, सिविल रिवीजन, मोटर वाहन अधिनियम से जुड़े मामले, दूसरी अपील, आपराधिक अपील और विभिन्न श्रेणियों के मामलों की सुनवाई सौंपी गई है।

कुछ बेंचों की सुनवाई दोपहर बाद होगी शुरू

हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से जारी रोस्टर के अनुसार कुछ सिंगल बेंचों की कार्यवाही दोपहर 2:15 बजे से अथवा संबंधित डिविजन बेंच की सूची पूरी होने के बाद शुरू होगी। इससे न्यायिक कार्यों का बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।

अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी नई व्यवस्था

हाईकोर्ट प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 10 अगस्त 2026 से लागू होने वाला यह नया रोस्टर अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। इसी व्यवस्था के अनुसार सभी मामलों की सुनवाई संबंधित बेंचों के समक्ष की जाएगी।


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