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अगस्त के बिजली बिल ने बढ़ाई चिंता, 65 लाख उपभोक्ताओं पर टैरिफ और FPPAAS शुल्क की दोहरी मार

अगस्त के बिजली बिल ने बढ़ाई चिंता, 65 लाख उपभोक्ताओं पर टैरिफ और FPPAAS शुल्क की दोहरी मार

रायपुर। छत्तीसगढ़ के लगभग 65 लाख बिजली उपभोक्ताओं के लिए अगस्त का महीना महंगा साबित होने वाला है। इस बार बिजली बिल में दोहरी बढ़ोतरी का असर देखने को मिलेगा। एक ओर जुलाई से नई बिजली दरें लागू हो चुकी हैं, वहीं दूसरी ओर FPPAAS (Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge) के कारण भी उपभोक्ताओं को अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ेगी। बिजली वितरण कंपनी ने जुलाई माह के लिए 18 प्रतिशत FPPAAS शुल्क निर्धारित किया है। हालांकि उपभोक्ताओं पर एकमुश्त बोझ कम करने के लिए इस राशि को दो किस्तों में वसूलने का निर्णय लिया गया है।

जुलाई का बकाया और अगस्त का शुल्क एक साथ जुड़ेगा

जुलाई के बिजली बिल में केवल 10 प्रतिशत FPPAAS शुल्क जोड़ा गया है, जबकि शेष 8 प्रतिशत की वसूली अगस्त के बिल में की जाएगी। इसी बिल में अगस्त माह का नया FPPAAS शुल्क भी शामिल रहेगा। ऐसे में उपभोक्ताओं के बिजली बिल में दोहरा असर दिखाई देगा और बिल की राशि पहले की तुलना में अधिक हो सकती है।

हर महीने बदल रहा है बिजली बिल का गणित

अब बिजली बिल हर महीने एक समान नहीं रहता। बिजली खरीद की लागत के आधार पर FPPAAS शुल्क हर माह तय किया जाता है, जिससे उपभोक्ताओं के बिल में लगातार बदलाव हो रहा है। साल की शुरुआत में जनवरी में दिसंबर माह का बिल आने पर कुल 13.64 प्रतिशत FPPAAS लगाया गया था। इसमें पहले का 5.43 प्रतिशत और दिसंबर का 8.21 प्रतिशत शुल्क शामिल था।

पिछले महीनों में ऐसे बदला FPPAAS शुल्क

बीते महीनों में बिजली बिल पर लगने वाला अतिरिक्त शुल्क लगातार बदलता रहा।

दिसंबर : 16.42%
जनवरी : 4.14% (पुराने शुल्क के साथ)
फरवरी : 5.91%
मार्च : 4.24%
अप्रैल : 3.98%
मई : 9.13%
जून : 11.33%
जुलाई : 18% (दो किस्तों में वसूली)
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पिछले दो महीनों में अतिरिक्त शुल्क में तेजी से वृद्धि हुई है।

क्यों बढ़ा FPPAAS शुल्क?

बिजली कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष भीषण गर्मी के दौरान राज्य में बिजली की मांग काफी बढ़ गई थी। मांग पूरी करने के लिए बाहरी राज्यों से महंगी बिजली खरीदनी पड़ी। इसके अलावा कोरबा के 210 मेगावाट क्षमता वाले दो बिजली संयंत्र लंबे समय तक बंद रहे। वर्तमान में भी एक संयंत्र बंद होने के कारण उत्पादन प्रभावित है, जिससे अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ रही है। इसी वजह से बिजली खरीद की लागत बढ़ी और उसका असर FPPAAS शुल्क के रूप में उपभोक्ताओं के बिल पर पड़ रहा है।

उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त के बिजली बिल में टैरिफ वृद्धि, जुलाई के बकाया FPPAAS शुल्क और नए मासिक शुल्क के एक साथ जुड़ने से लाखों उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अधिक भुगतान करना पड़ेगा। यदि आगामी महीनों में बिजली खरीद लागत कम नहीं होती है, तो FPPAAS शुल्क में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
 


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