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छत्तीसगढ़ में 'कचरा सेठों' पर सरकार सख्त! अब रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो होगी कार्रवाई

छत्तीसगढ़ में 'कचरा सेठों' पर सरकार सख्त! अब रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो होगी कार्रवाई

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 1 जुलाई से प्रत्येक बल्क वेस्ट जनरेटर (Bulk Waste Generator) का केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीयन सुनिश्चित किया जाए। बिना पंजीयन वाले संस्थानों के खिलाफ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

किन संस्थानों को कराना होगा पंजीयन

सरकार के अनुसार बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में वे सभी संस्थान आते हैं जो प्रतिदिन बड़ी मात्रा में ठोस कचरा उत्पन्न करते हैं। इनमें होटल, मॉल, मल्टीप्लेक्स, अस्पताल, निजी एवं सरकारी शिक्षण संस्थान, बड़े कार्यालय, विवाह भवन, आवासीय सोसायटी, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल हैं। इन संस्थानों को अब केवल कचरा नगर निकाय को सौंपना ही नहीं होगा, बल्कि उसके वैज्ञानिक प्रबंधन की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेंगे नगर निकाय

नगरीय निकायों को अपने-अपने क्षेत्र के सभी बल्क वेस्ट जनरेटरों का ऑनलाइन पंजीयन कराने के साथ उनका डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार करना होगा। पंजीयन के बाद प्राप्त ऑनलाइन रसीद के आधार पर प्रत्येक निकाय अद्यतन डेटाबेस तैयार करेगा, जिससे भविष्य में नियमों के पालन की निगरानी करना आसान होगा। इससे पहली बार राज्य में बड़े कचरा उत्पादकों का केंद्रीकृत डिजिटल डेटा उपलब्ध रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट और केंद्र के निर्देशों के बाद बढ़ी सख्ती

यह व्यवस्था केंद्र सरकार के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में लागू की गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ऑनलाइन पंजीयन पोर्टल शुरू करने के बाद राज्यों को इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ सरकार ने सभी स्थानीय निकायों को समयबद्ध तरीके से पंजीयन सुनिश्चित करने का आदेश जारी किया है।

नगर निकायों की जिम्मेदारी भी तय

सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी क्षेत्र में यदि कोई बल्क वेस्ट जनरेटर बिना पंजीयन के पाया जाता है तो संबंधित संस्थान के साथ-साथ निगरानी कर रहे स्थानीय निकाय की जवाबदेही भी तय की जाएगी। ऐसे में नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को नियमित निगरानी और रिकॉर्ड अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं।

ठोस कचरा प्रबंधन में नई पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से शहरों में कचरा प्रबंधन अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनेगा। बड़े कचरा उत्पादकों को अब अपने द्वारा उत्पन्न ठोस अपशिष्ट का रिकॉर्ड रखना होगा और उसके उचित निपटान की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्वच्छता व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।


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