बिहार के चर्चित रिशुश्री टेंडर घोटाले में विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने जांच पूरी करने के बाद बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने मामले में फरार आईएएस अधिकारी संजीव हंस समेत सात लोगों के खिलाफ निगरानी अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय (ED) से प्राप्त इनपुट और SVU की विस्तृत जांच के आधार पर की गई है।
जांच में मिले कई अहम सबूत
एसवीयू के एडीजी पंकज दराद ने बताया कि जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हुई है। मामले में रिशुश्री को मुख्य आरोपी माना गया है। उसके अलावा आईएएस संजीव हंस, पवन कुमार सहित कुल सात लोगों को अभियुक्त बनाया गया है। जांच में मुमुक्षु चौधरी, तारिणी दास और उमेश कुमार सिंह की भूमिका से जुड़े भी महत्वपूर्ण प्रमाण सामने आए हैं।
टेंडर दिलाने के बदले कमीशन लेने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार रिशुश्री पर सरकारी टेंडरों में हस्तक्षेप कर चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने का आरोप है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में प्रभाव का इस्तेमाल कर कंपनियों को काम दिलाया जाता था और इसके बदले कमीशन लिया जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि इस राशि का एक हिस्सा संबंधित अधिकारियों तक भी पहुंचाया जाता था।
परियोजना लागत बढ़ाने का मामला भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान कोसी बराज से जुड़ी एक परियोजना में लागत वृद्धि का मामला भी सामने आया। अधिकारियों के अनुसार शुरुआती अनुमानित लागत को बाद में काफी बढ़ाया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी परियोजना से जुड़े टेंडर को एक निजी कंपनी तक पहुंचाने में कथित तौर पर नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया था।
छापों में नकदी, जेवरात और लग्जरी वाहन बरामद
मामले की जांच के दौरान कई स्थानों पर छापेमारी की गई। कार्रवाई में करोड़ों रुपये की नकदी, कीमती आभूषण और महंगी गाड़ियों की बरामदगी हुई है। अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों के ठिकानों से मिले दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जांच में अहम भूमिका निभा रहे हैं। रिशुश्री के मोबाइल फोन से भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त होने का दावा किया गया है।
अदालत में पेश होंगे जांच के निष्कर्ष
एसवीयू का कहना है कि अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया है। मामले की आगे की सुनवाई निगरानी अदालत में होगी, जहां जांच एजेंसी अपने सबूत पेश करेगी। यह घोटाला बिहार के चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में से एक माना जा रहा है और इसकी जांच पर लंबे समय से नजर बनी हुई है।