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CG High Court: निलंबन के बाद मिली राहत, ASI नाजमा खान को मिलेगा 100% वेतन; कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश

CG High Court: निलंबन के बाद मिली राहत, ASI नाजमा खान को मिलेगा 100% वेतन; कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निलंबन अवधि के वेतन से जुड़े मामले में रायपुर की सहायक उप निरीक्षक (अ) नाजमा खान के पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उन्हें निलंबन अवधि का पूरा 100 प्रतिशत वेतन देने का आदेश दिया है। मामले में हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा वर्ष 2010 में जारी सर्कुलर को फैसले का आधार बनाया।

अवकाश स्वीकृत नहीं होने पर अनुपस्थित हुई थीं नाजमा खान

मामला रायपुर के मौदहापारा निवासी नाजमा खान से जुड़ा है, जो पुलिस अधीक्षक कार्यालय रायपुर में सहायक उप निरीक्षक (अ) के पद पर पदस्थ हैं। व्यक्तिगत कारणों से उन्होंने अवकाश के लिए आवेदन किया था, लेकिन आवेदन स्वीकृत नहीं होने के बाद वह ड्यूटी से अनुपस्थित हो गईं।

सेवा से अनुपस्थिति को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। इसी मामले में पुलिस अधीक्षक (रेल), रायपुर श्वेता श्रीवास्तव ने नाजमा खान को निलंबित कर दिया था।

करीब एक महीने बाद बहाली, लेकिन सिर्फ 50% वेतन का आदेश

निलंबन के लगभग एक महीने बाद नाजमा खान को सेवा में वापस बहाल कर दिया गया। हालांकि, बहाली के साथ उन्हें एक विभागीय दंड भी दिया गया।उनकी एक वेतनवृद्धि को एक वर्ष के लिए असंचयी प्रभाव से रोकने का लघु दंड लगाया गया। साथ ही निलंबन अवधि को निलंबन के रूप में ही मानते हुए उस अवधि के लिए केवल 50 प्रतिशत वेतन देने का आदेश जारी किया गया।इसी आदेश को नाजमा खान ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट में 2010 के सरकारी सर्कुलर का दिया हवाला

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और सुन्दरा साहू ने हाईकोर्ट के समक्ष पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने 23 नवंबर 2010 को निलंबन अवधि के वेतन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

अधिवक्ताओं के अनुसार, सर्कुलर के पैरा 6 में यह व्यवस्था है कि यदि किसी कर्मचारी को निलंबन से बहाल करने के बाद लघु दंड दिया जाता है, तो ऐसी स्थिति में निलंबन को उचित नहीं माना जा सकता। ऐसे कर्मचारी को निलंबन अवधि का पूरा वेतन दिए जाने का प्रावधान है।

कोर्ट ने माना—पूरे वेतन की हकदार हैं नाजमा खान

मामले की अंतिम सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि नाजमा खान को निलंबन से बहाल करने के बाद लघु दंड दिया गया था।

ऐसी स्थिति में 23 नवंबर 2010 के छत्तीसगढ़ शासन के सर्कुलर के अनुसार उन्हें निलंबन अवधि के वेतन से वंचित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने 50 प्रतिशत वेतन देने के आदेश को स्वीकार नहीं किया और नाजमा खान को निलंबन अवधि का 100 प्रतिशत वेतन देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने उनकी रिट याचिका स्वीकार कर ली।


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