भुवनेश्वर/विशाखापत्तनम। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणाली ने ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी बारिश और तेज हवाओं से जनजीवन प्रभावित किया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक यह सिस्टम चक्रवाती तूफान में तब्दील नहीं हुआ, बल्कि डीप डिप्रेशन के रूप में उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तट को पार कर गया। सिस्टम के तट पार करने के बाद भी कई इलाकों में भारी बारिश का खतरा बना रहा।
‘अर्नब’ नाम को लेकर क्या है स्थिति?
बंगाल की खाड़ी में बने इस सिस्टम को लेकर ‘Cyclone Arnab’ नाम की चर्चा इसलिए हुई क्योंकि उत्तर हिंद महासागर में बनने वाले अगले चक्रवाती तूफान के लिए ‘Arnab’ नाम निर्धारित है। हालांकि मौसम विभाग ने स्पष्ट किया था कि मौजूदा सिस्टम के चक्रवात बनने की संभावना नहीं है। यह डीप डिप्रेशन के रूप में ही तट पार कर गया।
आंध्र प्रदेश के तट से पार हुआ डीप डिप्रेशन
IMD के अनुसार डीप डिप्रेशन ने 23-24 सितंबर की रात उत्तर आंध्र प्रदेश के तट को कलिंगपट्टनम के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र के पास पार किया। इस दौरान 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और झोंकों की गति करीब 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची। तट पार करने के बाद मौसम प्रणाली धीरे-धीरे जमीन के ऊपर आगे बढ़ी। इसके प्रभाव से आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई, जबकि तटीय क्षेत्रों में तेज हवाओं के कारण सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं।
ओडिशा में भारी बारिश से बढ़ी परेशानी
डीप डिप्रेशन के प्रभाव से ओडिशा के दक्षिणी और तटीय जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की स्थिति बनी। कई इलाकों में लगातार बारिश के कारण नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ा, जिससे निचले क्षेत्रों में जलभराव का खतरा पैदा हुआ। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में एहतियाती कदम उठाए। कुछ जिलों में स्कूल बंद किए गए और संभावित बाढ़ तथा अन्य आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए राहत एवं बचाव व्यवस्था को तैयार रखा गया।
मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह
मौसम प्रणाली के प्रभाव से समुद्र की स्थिति खराब रहने का अनुमान था। ऐसे में तटीय इलाकों में मछुआरों को समुद्र में जाने से बचने की सलाह दी गई। आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटवर्ती इलाकों में प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन एजेंसियों को भी सतर्क रखा गया।
कई राज्यों में बारिश का असर
मौसम प्रणाली के तट पार करने के बाद इसका प्रभाव केवल ओडिशा और आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। इसके कारण मध्य और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान लगाया गया। संबंधित मौसम पूर्वानुमानों में छत्तीसगढ़, तेलंगाना, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश सहित कई क्षेत्रों में बारिश की संभावना बताई गई थी। लगातार बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव, स्थानीय बाढ़ और निचले इलाकों में आवागमन प्रभावित होने जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। इसलिए स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करना जरूरी है।
अब धीरे-धीरे कमजोर हो रहा मौसम सिस्टम
IMD के अनुसार तट पार करने के बाद डीप डिप्रेशन के धीरे-धीरे कमजोर होने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बावजूद सिस्टम से जुड़ी बारिश की गतिविधियां तुरंत खत्म नहीं होती हैं और कुछ क्षेत्रों में इसका असर बना रह सकता है।