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सेवा संकल्प शिविर में मिला सहारा, 6.50 लाख की आर्थिक मदद के साथ कृत्रिम अंग भी वितरित

सेवा संकल्प शिविर में मिला सहारा, 6.50 लाख की आर्थिक मदद के साथ कृत्रिम अंग भी वितरित

जगदलपुर। नक्सली हिंसा और आईईडी विस्फोटों की वजह से अपने हाथ-पैर गंवा चुके बस्तर के लोगों के लिए सेवा संकल्प शिविर नई उम्मीद लेकर आया। जगदलपुर में आयोजित जिला स्तरीय शिविर में प्रभावित ग्रामीणों और दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं विभिन्न सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए। कृत्रिम हाथ मिलने के बाद एक हितग्राही ने उसी हाथ से पानी की बोतल उठाकर पानी पिया। यह भावुक पल देखकर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इसे जिंदगी बदलने वाली पहल बताया। शिविर में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर लंबे समय तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहा है। अब क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास का माहौल तैयार किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य प्रभावित नागरिकों को सुरक्षा के साथ-साथ पुनर्वास, रोजगार और बेहतर जीवन के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है।

कृत्रिम हाथ से पानी की बोतल उठाई, लौट आया आत्मविश्वास

शिविर के दौरान एक ऐसा पल सामने आया जिसने सभी को भावुक कर दिया। कृत्रिम हाथ लगने के बाद एक हितग्राही ने खुद पानी की बोतल उठाई और पानी पिया। लंबे समय बाद अपने हाथ से सामान्य काम कर पाने की खुशी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दी। विजय शर्मा ने इस अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को दोबारा आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश केवल सहायता नहीं, बल्कि उसके आत्मविश्वास और जीवन को नई दिशा देने का प्रयास है।

नक्सल हिंसा प्रभावितों को मुफ्त कृत्रिम अंग और उपकरण

सेवा संकल्प शिविर में नक्सली हिंसा और आईईडी विस्फोटों से प्रभावित नागरिकों तथा दिव्यांगजनों को उच्च गुणवत्ता वाले कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। तीन दिवसीय इस विशेष शिविर का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन-प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से बस्तर में माओवादी हिंसा के प्रभाव को कम करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। अब क्षेत्र में हिंसा के स्थान पर विकास और जनसेवा को प्राथमिकता दी जा रही है।

6.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी दी गई

सेवा संकल्प शिविर में विभिन्न विभागों ने पात्र हितग्राहियों को कई योजनाओं का लाभ प्रदान किया। राजस्व विभाग ने आपदा प्रबंधन के तहत पांच बाढ़ प्रभावित लोगों को कुल 6 लाख 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी। इसके अलावा 35 हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख वितरित किए गए। श्रम विभाग की ओर से मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत एक हितग्राही को 20 हजार रुपये तथा मुख्यमंत्री मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के तहत एक पात्र व्यक्ति को एक लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई।

किसानों और मछुआरों को भी मिला योजनाओं का लाभ

कृषि विभाग ने पांच किसानों को फसल बीमा प्रमाण पत्र वितरित किए। वहीं मत्स्य पालन विभाग ने तीन मत्स्य पालकों को मछली पकड़ने के जाल उपलब्ध कराए। स्वास्थ्य विभाग ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए वय वंदन कार्ड तथा पात्र नागरिकों के आयुष्मान कार्ड बनाए। शिविर में 12 नागरिकों के आधार विवरण में आवश्यक सुधार और अपडेट भी किए गए। इसके साथ ही जन्म एवं मृत्यु पंजीयन से संबंधित आवेदन भी मौके पर स्वीकार किए गए।

सांसद महेश कश्यप ने गिनाईं बस्तर में विकास की उपलब्धियां

बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों का असर अब बस्तर के दूरदराज क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक उग्रवाद की वजह से बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे इलाकों में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, मुफ्त राशन, पक्के आवास और शौचालय जैसी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

एक ही जगह मिल रही कई सरकारी सेवाएं

सेवा संकल्प शिविर की खासियत यह है कि लोगों को अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। एक ही परिसर में विभिन्न विभागों की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अधिकारियों की मौजूदगी में नागरिकों की समस्याओं का मौके पर समाधान करने के साथ पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। ऐसे शिविरों से दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सरकारी सुविधाओं तक पहुंच आसान हो रही है।

बस्तर में विकास और पुनर्वास पर जोर

सेवा संकल्प शिविर में सामने आया कृत्रिम हाथ से पानी पीने का भावुक दृश्य इस बात का उदाहरण बना कि पुनर्वास की छोटी-सी पहल भी किसी व्यक्ति के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। सरकार की ओर से नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऐसे प्रयासों पर जोर दिया जा रहा है।


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