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बस्तर पंडुम-2026 का भव्य शुभारंभ: आदिवासियों की संस्कृति में बसती है छत्तीसगढ़ की आत्मा - राष्ट्रपति मुर्मु

बस्तर पंडुम-2026 का भव्य शुभारंभ: आदिवासियों की संस्कृति में बसती है छत्तीसगढ़ की आत्मा - राष्ट्रपति मुर्मु

बस्तर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज सुबह बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुँचीं, जहाँ उन्होंने संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम-2026 का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति में ही छत्तीसगढ़ की आत्मा बसती है। राष्ट्रपति ने बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के जयघोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की और बस्तर की जनजातीय परंपराओं को देश की अमूल्य धरोहर बताया।

लालबाग मैदान में उमड़ा जनसैलाब

जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान में आयोजित इस शुभारंभ समारोह में हजारों की संख्या में आदिवासी कलाकार और आम नागरिक उपस्थित रहे। राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय समाज के उत्थान के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। पीएम जनमन, प्रधानमंत्री जनजातीय गौरव उत्कर्ष अभियान और नियद नेल्ला नार जैसी योजनाओं के माध्यम से आदिवासी समुदाय को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समाज की प्रगति के लिए शिक्षा सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने कहा कि इसके लिए शासन के साथ-साथ माता-पिता और समाज को भी आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम जनजातीय समाज की पहचान, गौरव और समृद्ध परंपराओं को आगे बढ़ाने का सशक्त मंच है।

54 हजार से अधिक कलाकारों का पंजीयन

राष्ट्रपति ने जानकारी दी कि इस वर्ष बस्तर पंडुम में 54 हजार से अधिक आदिवासी कलाकारों ने पंजीयन कराया है। यह संख्या इस बात का प्रमाण है कि जनजातीय समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़ा हुआ है और अपनी परंपराओं को सहेजने के लिए सजग है।

बस्तर में लौट रही शांति और विकास

राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर लंबे समय तक माओवादी हिंसा से प्रभावित रहा, जिससे यहां के लोगों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। केंद्र सरकार की निर्णायक कार्रवाई और राज्य सरकार के प्रयासों से अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। हिंसा का रास्ता छोड़कर लोग लोकतंत्र में विश्वास जता रहे हैं। वर्षों से बंद स्कूल फिर से खुल रहे हैं और गांव-गांव में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँच रही हैं।

जनजातीय कला और हस्तशिल्प की भव्य प्रदर्शनी

शुभारंभ समारोह के बाद राष्ट्रपति ने आयोजन स्थल पर लगी जनजातीय संस्कृति और हस्तशिल्प पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर स्थानीय कारीगरों और कलाकारों से उनके कार्यों की जानकारी ली और उनकी सराहना की।

ढोकरा से लेकर जनजातीय व्यंजनों तक आकर्षक प्रदर्शन

प्रदर्शनी में ढोकरा शिल्प, टेराकोटा कला, लकड़ी की नक्काशी, सीसल और बांस शिल्प, लौह शिल्प, जनजातीय वेश-भूषा व आभूषण, तुम्बा कला, जनजातीय चित्रकला और पारंपरिक व्यंजनों का आकर्षक प्रदर्शन किया गया। राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे आयोजन आदिवासी विरासत को संरक्षित करने और उसे राष्ट्रीय व वैश्विक मंच तक पहुँचाने का प्रभावी माध्यम हैं।

 


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