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Basant Panchami 2026: गजकेसरी, बुधादित्य और सर्वार्थ सिद्धि योग से चमकेगा ज्ञान का पर्व...

Basant Panchami 2026: गजकेसरी, बुधादित्य और सर्वार्थ सिद्धि योग से चमकेगा ज्ञान का पर्व...

Basant Panchami 2026: ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती की आराधना का पावन पर्व बसंत पंचमी 2026 इस बार अत्यंत शुभ योगों के साथ मनाया जा रहा है। माघ मास की पंचमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व को सरस्वती जन्मोत्सव के रूप में भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां सरस्वती की विधिवत पूजा करने से बुद्धि, स्मरण शक्ति और ज्ञान में वृद्धि होती है।

दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग से विशेष बनी बसंत पंचमी:

बसंत पंचमी के दिन चंद्रमा का मीन राशि में गोचर होगा। चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु की स्थिति के कारण गजकेसरी योग का निर्माण हो रहा है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। यह योग विशेष रूप से छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और शिक्षण क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए लाभकारी माना गया है।

बुधादित्य योग देगा करियर और व्यापार में उन्नति:

23 जनवरी को सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग भी बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह योग शिक्षा, नौकरी, व्यापार और निर्णय क्षमता को मजबूत करता है। इस योग में शुरू किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

सर्वार्थ सिद्धि योग में होंगे हर कार्य सफल:

बसंत पंचमी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। इस योग में नए कार्यों की शुरुआत, शिक्षा से जुड़े निर्णय, व्यापारिक सौदे और निवेश करना शुभ माना जाता है।

सरस्वती पूजा 2026 के 3 प्रमुख शुभ मुहूर्त:

प्रथम मुहूर्त: सुबह 7:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 बजे से 12:54 बजे तक
अमृतकाल: सुबह 9:31 बजे से 11:05 बजे तक

पंचांग और नक्षत्र योग:

पंचांग के अनुसार, माघ पंचमी तिथि का आरंभ गुरुवार को रात 2 बजे हुआ और इसका समापन 24 जनवरी को रात 1:46 बजे होगा। इस दिन पहले पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र, उसके बाद उत्तराभाद्रपद नक्षत्र रहेगा। साथ ही परिध और शिव योग का संयोग भी बना हुआ है।

चतुर्ग्रही योग का प्रभाव:

ज्योतिषियों के अनुसार, मकर राशि में सूर्य, बुध, मंगल और शुक्र की युति से चतुर्ग्रही योग बन रहा है। यह योग बसंत पंचमी के दिन सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फलों को और अधिक बढ़ाने वाला माना जा रहा है। बसंत पंचमी 2026 न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि ज्योतिषीय रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा, विद्या आरंभ, नए कार्यों की शुरुआत और करियर से जुड़े निर्णय लेना शुभ फल प्रदान कर सकता है।


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