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बलौदाबाजार की बेटी ने भरी सपनों की उड़ान, शिवांशी केसरवानी बनीं क्षेत्र की पहली कमर्शियल पायलट

बलौदाबाजार की बेटी ने भरी सपनों की उड़ान, शिवांशी केसरवानी बनीं क्षेत्र की पहली कमर्शियल पायलट

बलौदाबाजार। मेहनत, लगन और बड़े सपनों के दम पर बलौदाबाजार की बेटी शिवांशी केसरवानी ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। अमेरिका में पायलट ट्रेनिंग पूरी करने के बाद शिवांशी ने कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) हासिल कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ वह बलौदाबाजार क्षेत्र की पहली कमर्शियल पायलट बनने वाली बेटी बन गई हैं।

अमेरिका में पूरी की पायलट ट्रेनिंग

विमानन क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखने वाली शिवांशी ने अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए अमेरिका का रुख किया। वहां उन्होंने विमान उड़ाने की बारीकियों और कमर्शियल पायलट बनने के लिए जरूरी प्रशिक्षण हासिल किया। प्रशिक्षण के दौरान लगातार अभ्यास, अनुशासन और कठिन मेहनत के बाद उन्होंने Commercial Pilot Licence (CPL) प्राप्त किया। उनकी इस सफलता ने साबित कर दिया कि छोटे शहरों से आने वाले युवा भी बड़े और चुनौतीपूर्ण करियर क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकते हैं।

परिवार के साथ पूरे क्षेत्र को मिली खुशी

शिवांशी की इस उपलब्धि से उनके परिवार में खुशी का माहौल है। उनकी सफलता को बलौदाबाजार क्षेत्र के लिए भी गौरव का क्षण माना जा रहा है। एक छोटे शहर से निकलकर अमेरिका में विमानन प्रशिक्षण हासिल करना और फिर कमर्शियल पायलट लाइसेंस प्राप्त करना उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत को दर्शाता है।

बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

शिवांशी केसरवानी की कहानी उन बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो पारंपरिक करियर विकल्पों से आगे बढ़कर विमानन जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अपना भविष्य बनाना चाहती हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और उसे हासिल करने के लिए निरंतर मेहनत की जाए, तो छोटे शहर से निकलकर भी दुनिया के बड़े मंच पर अपनी पहचान बनाई जा सकती है।

अब आसमान में नई ऊंचाइयों का लक्ष्य

कमर्शियल पायलट लाइसेंस हासिल करने के बाद शिवांशी के सामने अब विमानन क्षेत्र में आगे बढ़ने के नए अवसर हैं। उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ उनके व्यक्तिगत सपने की उड़ान है, बल्कि बलौदाबाजार की उन बेटियों के लिए भी उम्मीद और प्रेरणा है, जो आसमान को अपना कार्यक्षेत्र बनाना चाहती हैं। शिवांशी की कहानी इस बात की मिसाल है कि हौसले मजबूत हों तो आसमान भी मंजिल बन सकता है।


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