देश में शिक्षा, राजनीति और RTI को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में अभिजीत दिपके ने अपनी पढ़ाई और विदेश में शिक्षा हासिल करने को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वे अपनी स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं को चुनौती देते हुए पूछा कि क्या वे भी अपनी शैक्षणिक डिग्री सार्वजनिक करेंगे। यह विवाद उस समय और गहरा गया जब गुजरात के सूरत के एक RTI कार्यकर्ता ने चुनाव आयोग और केंद्रीय GST विभाग को पत्र लिखकर अभिजीत दिपके के परिवार की आर्थिक स्थिति, विदेश में पढ़ाई के खर्च, CJP के लीगल डिफेंस फंड और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल द्वारा घोषित एक करोड़ रुपये की सहायता राशि की जांच की मांग की।
सोशल मीडिया वीडियो में क्या बोले अभिजीत दिपके?
अभिजीत दिपके ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि यदि उनकी पढ़ाई और विदेश में शिक्षा को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं तो वे अपनी स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से जुड़े सभी दस्तावेज दिखाने के लिए तैयार हैं। न्होंने कहा कि अगर एक साधारण परिवार का छात्र मेहनत और स्कॉलरशिप के दम पर विदेश में पढ़ाई करता है तो इसे संदेह की नजर से क्यों देखा जा रहा है। साथ ही उन्होंने बीजेपी नेताओं से उनकी शैक्षणिक योग्यता और डिग्री सार्वजनिक करने की मांग भी की।
RTI कार्यकर्ता ने किन बिंदुओं पर जांच की मांग की?
सूरत के RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने चुनाव आयोग और केंद्रीय GST विभाग को भेजे गए पत्र में अभिजीत दिपके के पिता की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि महाराष्ट्र सरकार के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने बेटे की विदेश में उच्च शिक्षा का खर्च किस प्रकार वहन कर सके। इसके अलावा उन्होंने पढ़ाई में उपयोग किए गए आर्थिक स्रोतों की भी जांच कराने की मांग की है।
CJP लीगल डिफेंस फंड भी विवाद के केंद्र में
RTI आवेदन में Citizens for Justice and Peace (CJP) द्वारा NEET पेपर लीक मामले में गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों के लिए जुटाए जा रहे लीगल डिफेंस फंड पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि यदि संस्था राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय है और फंड एकत्र कर रही है, तो उसके वैधानिक दर्जे और चुनाव आयोग के नियमों के तहत उसकी स्थिति की भी जांच होनी चाहिए।
कपिल सिब्बल के एक करोड़ रुपये के योगदान पर भी सवाल
RTI कार्यकर्ता ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBEC) को भी पत्र लिखकर वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा घोषित एक करोड़ रुपये के लीगल डिफेंस फंड पर GST नियमों के अनुपालन की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि इस राशि के कर संबंधी पहलुओं की भी जांच होनी चाहिए।
कैसे बढ़ता गया पूरा विवाद?
पूरे मामले की शुरुआत अभिजीत दिपके की शिक्षा को लेकर दाखिल RTI आवेदन से हुई। इसके बाद उन्होंने वीडियो जारी कर अपनी ओर से सफाई दी और स्कॉलरशिप व एजुकेशन लोन के दस्तावेज दिखाने की बात कही। इसके बाद मामला उनके परिवार की आर्थिक स्थिति, CJP के फंड, संस्था की कानूनी स्थिति और कपिल सिब्बल द्वारा घोषित आर्थिक सहायता तक पहुंच गया। अब यह विवाद कई सरकारी एजेंसियों के समक्ष जांच की मांग तक पहुंच चुका है।
फिलहाल क्या है स्थिति?
अभी तक इस मामले में किसी भी जांच एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक निष्कर्ष या कार्रवाई सार्वजनिक नहीं की गई है। एक ओर अभिजीत दिपके अपने शैक्षणिक दस्तावेज सार्वजनिक करने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर RTI कार्यकर्ता विभिन्न सरकारी संस्थाओं से जांच की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि संबंधित एजेंसियां इन शिकायतों पर आगे क्या कदम उठाती हैं।
नोट: इस मामले में लगाए गए आरोप और दावे संबंधित पक्षों के सार्वजनिक बयानों और शिकायतों पर आधारित हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि या जांच का अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।