तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता के विफल होते ही वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल मच गई है। कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल दर्ज किया गया है, वहीं दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है।
100 डॉलर के पार पहुंचा क्रूड ऑयल
वार्ता टूटने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में तेजी लौट आई है। WTI क्रूड की कीमत करीब 8% उछलकर 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। वहीं ब्रेंट क्रूड भी 7% बढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। विशेषज्ञों केअनुसार, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और सप्लाई बाधित होने की आशंका ने कीमतों को ऊपर धकेला है।
ग्लोबल शेयर बाजारों में मची भगदड़
तेल की कीमतों में उछाल का असर सीधे शेयर बाजारों पर पड़ा है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन एशियाई बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई। जापान का Nikkei इंडेक्स 600 अंक से ज्यादा टूटा है, हांगकांग का Hang Seng करीब 400 अंक गिर गया है, वहीं दक्षिण कोरिया का KOSPI 1.5% नीचे फिसला, साथ ही यूरोपीय बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली और सभी प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में रहे।
भारतीय बाजार के लिए रेड सिग्नल
ग्लोबल संकेतों का असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ने की आशंका है। Gift Nifty शुरुआती कारोबार में ही करीब 300 अंक गिरकर 23,700 के स्तर पर आ गया, जो बाजार में संभावित गिरावट का संकेत दे रहा है। हालांकि पिछले कारोबारी सत्र में BSE Sensex 918 अंक चढ़कर 77,550 पर बंद हुआ था। NSE Nifty 275 अंक की बढ़त के साथ 24,050 पर रहा है।
ट्रंप के सख्त तेवर, सैन्य कार्रवाई की आशंका
शांति वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख और सख्त हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी के आदेश दिए गए हैं, ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई पर भी विचार किया जा रहा है। इससे क्षेत्र में युद्ध की आशंका और गहरा गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा जोखिम
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तनाव इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि दुनिया के लगभग 20% तेल की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है। यदि यहां कोई बाधा आती है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है और कीमतें और बढ़ सकती हैं।
करेंसी और कमोडिटी मार्केट पर असर
अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और ब्रिटिश पाउंड में कमजोरी है। सोने की कीमतों में मुनाफावसूली के चलते गिरावट आई है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। महंगाई पर दबाव बढ़ेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा। अमेरिका-ईरान तनाव ने एक बार फिर वैश्विक बाजारों को झकझोर दिया है। तेल की कीमतों में तेजी और शेयर बाजारों में गिरावट ने आने वाले दिनों के लिए अनिश्चितता बढ़ा दी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि कूटनीतिक स्तर पर हालात कब तक संभलते हैं।