भोपाल। मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत से जुड़े बहुचर्चित मामले में मंगलवार को भोपाल जिला अदालत में महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। इस दौरान मामले के दोनों आरोपी सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे एडवोकेट समर्थ सिंह को न्यायिक हिरासत से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश किए जाने की संभावना है। इस सुनवाई पर इसलिए भी सभी की नजरें टिकी हैं क्योंकि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) दिल्ली स्थित AIIMS की दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत कर सकती है।
AIIMS की दूसरी रिपोर्ट बन सकती है जांच का अहम आधार
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली AIIMS के मेडिकल बोर्ड द्वारा तैयार की गई दूसरी फॉरेंसिक रिपोर्ट अब जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह रिपोर्ट पहले पोस्टमॉर्टम पर उठे सवालों के बाद तैयार कराई गई थी और माना जा रहा है कि कोर्ट में इसे पेश किए जाने के बाद मामले से जुड़े कई पहलुओं पर स्पष्टता आ सकती है। हालांकि रिपोर्ट की आधिकारिक सामग्री अभी सार्वजनिक नहीं की गई है और इसकी पुष्टि केवल अदालत में प्रस्तुत होने के बाद ही संभव होगी।
12 मई को हुई थी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत
ट्विशा शर्मा की 12 मई 2026 की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया था, जबकि मायके पक्ष ने हत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी। पहले पोस्टमॉर्टम को लेकर विवाद सामने आने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दिल्ली AIIMS के विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने के निर्देश दिए थे।
25 मई से CBI कर रही है जांच
हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI ने 25 मई 2026 से मामले की जांच अपने हाथ में ली। एजेंसी ने अब तक घटनास्थल का निरीक्षण, वैज्ञानिक साक्ष्यों का विश्लेषण, डिजिटल रिकॉर्ड की जांच और फॉरेंसिक परीक्षण सहित कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जांच के दौरान CBI ने घटनास्थल पर डमी की मदद से सीन रिक्रिएशन भी किया, ताकि घटनाक्रम को वैज्ञानिक तरीके से समझा जा सके।
AIIMS मेडिकल बोर्ड ने सौंपी अंतिम रिपोर्ट
जानकारी के अनुसार, AIIMS के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने 10 जुलाई को 11 पन्नों की अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में CBI को सौंप दी थी। रिपोर्ट की एक प्रति मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि जांच के दौरान कथित तौर पर फांसी में इस्तेमाल की गई जिम बेल्ट पर मिले स्किन टिश्यू और गर्दन पर पाए गए लिगेचर मार्क के बीच वैज्ञानिक समानता का उल्लेख किया गया है। हालांकि इन तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि अदालत में रिपोर्ट पेश होने के बाद ही मानी जाएगी।
तय समय सीमा के कारण भी अहम है सुनवाई
CBI ने 25 मई को जांच शुरू की थी। कानूनी प्रावधानों के तहत एजेंसी को निर्धारित समय सीमा के भीतर अदालत में चार्जशीट (चालान) दाखिल करनी होगी। यदि ऐसा तय अवधि में नहीं हो पाता है, तो आरोपियों को कानून के तहत डिफॉल्ट जमानत मांगने का अधिकार मिल सकता है। ऐसे में मंगलवार की सुनवाई न केवल जांच की दिशा बल्कि आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।