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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हिरासत में लेते ही शुरू होगी 24 घंटे की गिनती, गिरफ्तारी दिखाने के समय से नहीं चलेगा हिसाब

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हिरासत में लेते ही शुरू होगी 24 घंटे की गिनती, गिरफ्तारी दिखाने के समय से नहीं चलेगा हिसाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी और पुलिस हिरासत से जुड़े एक अहम कानूनी सवाल पर बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य है। इस समय-सीमा की गणना पुलिस द्वारा औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज करने के समय से नहीं, बल्कि व्यक्ति को वास्तविक रूप से हिरासत में लेने के समय से की जाएगी।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हिरासत में लेना और औपचारिक गिरफ्तारी करना, दोनों ही व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रभावित करते हैं। ऐसे में पुलिस केवल गिरफ्तारी की औपचारिक तारीख या समय दर्ज करके 24 घंटे की संवैधानिक समय-सीमा को आगे नहीं बढ़ा सकती।

हिरासत और गिरफ्तारी के बीच अंतर पर कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कुछ हाई कोर्ट के उस दृष्टिकोण पर भी असहमति जताई, जिसमें हिरासत में लेने और औपचारिक गिरफ्तारी के बीच कानूनी अंतर के आधार पर अलग-अलग समय-सीमा मानी जा रही थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की वास्तविक स्वतंत्रता पर रोक कब लगी, यह तय करना महत्वपूर्ण है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला त्रिपुरा हाई कोर्ट के एक आदेश से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, चार लोगों को 29 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था, जबकि पुलिस रिकॉर्ड में उनकी गिरफ्तारी 30 सितंबर को दिखाई गई। आरोपियों ने दलील दी थी कि उन्हें हिरासत में लेने के 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया।

हालांकि, त्रिपुरा हाई कोर्ट ने उनकी इस दलील को स्वीकार नहीं किया था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां शीर्ष अदालत ने 24 घंटे की समय-सीमा की गणना को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी। इस फैसले को पुलिस हिरासत और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

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