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सुकमा के इस गांव में पादरियों की एंट्री बैन, ग्रामसभा का बड़ा फैसला

सुकमा के इस गांव में पादरियों की एंट्री बैन, ग्रामसभा का बड़ा फैसला

सुकमा जिले के कोन्टा विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत दरभागुड़ा में ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। प्रस्ताव के तहत गांव को 'पादरी प्रवेश निषेध ग्राम' घोषित करने का निर्णय लिया गया है। ग्रामसभा का कहना है कि यह फैसला गांव की पारंपरिक संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और आदिवासी पहचान को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया गया है। प्रस्ताव की प्रति जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को भी भेजी गई है।

विशेष ग्रामसभा में लिया गया निर्णय

13 जून को आयोजित विशेष ग्रामसभा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और परंपरागत धार्मिक पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने बाहरी धार्मिक गतिविधियों और कथित धर्मांतरण के प्रयासों पर चिंता व्यक्त करते हुए गांव में ऐसे कार्यों पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया।

सरपंच ने बताई फैसले की वजह

ग्राम पंचायत के सरपंच विराज माड़वी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में गांव के कुछ लोगों के धर्म परिवर्तन की घटनाओं को लेकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ी थी। उनका कहना है कि ग्रामसभा ने स्थानीय परंपराओं, देवी-देवताओं की पूजा-पद्धति और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए यह निर्णय लिया है।

प्रशासन को भेजा गया प्रस्ताव

कोन्टा के एसडीएम सुभाष शुक्ला ने पुष्टि की है कि ग्रामसभा द्वारा पारित प्रस्ताव प्रशासन को प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि पत्र में गांव को पादरी प्रवेश निषेध घोषित करने और अवैध धर्मांतरण से जुड़े प्रस्ताव का उल्लेख किया गया है। प्रशासन नियमानुसार मामले का परीक्षण करेगा।

फैसले की क्षेत्रभर में चर्चा

दरभागुड़ा ग्रामसभा के इस निर्णय के बाद पूरे इलाके में इसकी चर्चा शुरू हो गई है। ग्रामीण इसे अपनी सांस्कृतिक विरासत और आदिवासी परंपराओं के संरक्षण की दिशा में अहम कदम बता रहे हैं। वहीं प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी लोगों की नजर बनी हुई है।

 


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