होम
देश
दुनिया
राज्य
खेल
अध्यात्म
मनोरंजन
सेहत
जॉब अलर्ट
जरा हटके
फैशन/लाइफ स्टाइल

 

रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़ा हमला: राहत केंद्र पर गिरे 10 गाइडेड बम, 24 नागरिकों 24 की मौत

रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़ा हमला: राहत केंद्र पर गिरे 10 गाइडेड बम, 24 नागरिकों 24 की मौत

Russia Ukraine War: यूक्रेन में रूस के हमले से शांति प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। जापोरिज्जिया क्षेत्र में मानवीय सहायता केंद्र और स्कूल को निशाना बनाए जाने से 24 लोगों की मौत होने का दावा किया गया है। वहीं, दोनों देशों के इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम पर साइबर हमले के बाद नागरिकों को परमाणु हमले और रेडिएशन से जुड़े फर्जी संदेश भेजे गए।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। शांति स्थापित करने और आम नागरिकों को राहत पहुंचाने की कोशिशों के बीच दक्षिणी यूक्रेन में हुए ताजा हवाई हमले ने हालात को और गंभीर बना दिया है। यूक्रेन के अधिकारियों के मुताबिक, जापोरिज्जिया क्षेत्र के एक गांव में राहत सामग्री लेने पहुंचे लोगों को निशाना बनाया गया।

इस हमले में 24 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। इस घटना के बाद यूक्रेन ने रूस पर नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। दूसरी तरफ, दोनों देशों में सरकारी इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम को निशाना बनाकर किए गए साइबर हमले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

जापोरिज्जिया में राहत केंद्र पर गिरे 10 गाइडेड बम

यूक्रेन की आपातकालीन सेवाओं और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, हमला दक्षिणी यूक्रेन के जापोरिज्जिया क्षेत्र के कोमिशुवाखा गांव में हुआ। यहां एक स्कूल की इमारत में जरूरतमंद नागरिकों को मानवीय सहायता और जरूरी सामान वितरित किया जा रहा था। इसी परिसर के आसपास लोगों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल भी बनाया गया था। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया कि रूसी सेना ने इस इलाके में 10 गाइडेड बम गिराए। हमले की चपेट में आने से राहत केंद्र को भारी नुकसान पहुंचा और आसपास की इमारतें भी क्षतिग्रस्त हो गईं। यूक्रेनी पक्ष की ओर से जारी जानकारी में इस हमले में 24 नागरिकों की मौत की बात कही गई है। राहत सामग्री लेने पहुंचे लोगों के हताहत होने की खबर ने मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है।

जेलेंस्की ने रूस पर लगाए गंभीर आरोप

राहत केंद्र पर हुए हमले के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रूस की सैन्य कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के हमले शांति की दिशा में आगे बढ़ने की किसी भी संभावना को कमजोर करते हैं। जेलेंस्की के मुताबिक, जब युद्ध को कम करने और आम लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिशें की जा रही थीं, उसी दौरान नागरिकों के बीच इस तरह की बमबारी की गई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की अपील भी की। यूक्रेनी राष्ट्रपति का कहना है कि इस कार्रवाई से संकेत मिलता है कि रूस फिलहाल संघर्ष समाप्त करने के बजाय सैन्य दबाव बनाए रखना चाहता है।

युद्धविराम खत्म होते ही खेरसॉन में बढ़ी सैन्य गतिविधियां

दक्षिणी यूक्रेन में यह हमला ऐसे समय हुआ, जब खेरसॉन क्षेत्र में लागू सीमित युद्धविराम की अवधि समाप्त हो गई थी। इस अस्थायी व्यवस्था का उद्देश्य संघर्ष प्रभावित इलाकों में फंसे नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और जरूरतमंद लोगों को राहत सामग्री उपलब्ध कराना था। युद्धविराम के दौरान अग्रिम मोर्चों और संवेदनशील क्षेत्रों में मानवीय सहायता पहुंचाने की सीमित अनुमति दी गई थी। हालांकि, इसकी अवधि समाप्त होने के बाद इलाके में फिर से सैन्य गतिविधियां तेज होने की खबरें सामने आईं। यूक्रेन की ओर से रूसी सेना पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए दबाव बढ़ाने का आरोप लगाया गया है। इससे पहले से तनावपूर्ण हालात और अधिक गंभीर हो गए हैं।

साइबर हमले से रूस और यूक्रेन में फैली दहशत

रूस-यूक्रेन संघर्ष अब केवल जमीन और आसमान तक सीमित नहीं रह गया है। दोनों देशों में सरकारी आपातकालीन चेतावनी प्रणाली को निशाना बनाकर किए गए कथित साइबर हमले ने एक नया सुरक्षा संकट खड़ा कर दिया।

जानकारी के मुताबिक, अज्ञात हैकर्स ने यूक्रेन और रूस के इमरजेंसी अलर्ट ऐप्स में सेंध लगाई। इसके बाद लोगों के मोबाइल फोन पर ऐसे संदेश पहुंचने लगे, जिनमें परमाणु हमले, रेडिएशन के खतरनाक स्तर और रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल जैसी चेतावनियां दी गई थीं। इन संदेशों में यूक्रेन की राजधानी कीव में अशांति फैलने का दावा भी किया गया।

फर्जी अलर्ट अंग्रेजी, रूसी और यूक्रेनी भाषाओं में भेजे जाने की बात सामने आई है। इस घटनाक्रम ने साइबर सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया, क्योंकि आपातकालीन अलर्ट सिस्टम का इस्तेमाल आम नागरिकों को वास्तविक खतरे की स्थिति में सूचना देने के लिए किया जाता है।

'ओरेश्निक मिसाइल आ रही है', फर्जी संदेश से बढ़ी चिंता

साइबर हमले के दौरान भेजे गए एक रूसी भाषा के संदेश में दावा किया गया कि यूक्रेन पर परमाणु हमले का खतरा है और ओरेश्निक मिसाइल आने वाली है। गौरतलब है कि ओरेश्निक रूस की उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली से जुड़ा नाम है। ऐसे में इस तरह के संदेशों ने लोगों के बीच भ्रम और चिंता पैदा करने की कोशिश की। रूस की सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े कुछ चैनलों ने 'हिटकोर' नाम के हैकिंग समूह पर इस साइबर हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन ने अपने इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम को रीसेट करके दोबारा बहाल कर लिया। फर्जी चेतावनियों के बावजूद वहां बड़े पैमाने पर दहशत फैलने की पुष्टि नहीं हुई।

शांति वार्ता के बीच बढ़ती चुनौतियां

रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष में ताजा घटनाक्रम ने मानवीय सुरक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियों को एक बार फिर सामने ला दिया है। एक तरफ राहत केंद्र पर हमले से नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं, तो दूसरी तरफ फर्जी परमाणु अलर्ट ने साइबर युद्ध के खतरनाक पहलू को उजागर किया है। अब सबसे बड़ी चुनौती युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की है।
 


संबंधित समाचार