उत्तर प्रदेश के हाथरस में पानी की बोतल की कीमत से महज 2 रुपये अधिक वसूलना एक रेस्टोरेंट को भारी पड़ गया। ₹18 एमआरपी वाली पानी की बोतल के लिए ग्राहक से ₹20 लिए गए। इतना ही नहीं, बिल में अलग से जीएसटी भी जोड़ दिया गया। ग्राहक ने जब अतिरिक्त वसूली का विरोध किया, तो रेस्टोरेंट प्रबंधन ने पैसे लौटाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उपभोक्ता ने कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया। मामले की सुनवाई के दौरान रेस्टोरेंट की ओर से कोई प्रतिनिधि पेश नहीं हुआ, जिसके बाद आयोग ने एकपक्षीय फैसला सुनाते हुए कुल ₹1.06 लाख की राशि देने का आदेश दिया।
₹2 के लिए शिकायत करने पर रेस्टोरेंट ने क्या कहा?
मामला हाथरस के चर्चित बीबीसीएन रेस्टोरेंट से जुड़ा है। केस की पैरवी कर रहे अधिवक्ता अंकुर अग्रवाल के मुताबिक, ग्राहक ने पानी की बोतल की निर्धारित कीमत से अधिक पैसे लिए जाने पर आपत्ति जताई थी। ग्राहक को राहत देने या अतिरिक्त रकम वापस करने के बजाय रेस्टोरेंट की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि किसी बड़े होटल में इसी पानी की बोतल के लिए ₹50 तक वसूले जाते हैं।
रेस्टोरेंट के इस जवाब से मामला और बढ़ गया। इसके बाद प्रबंधन को कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन नोटिस का जवाब नहीं मिला। आखिरकार ग्राहक ने अलीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
नोटिस के बाद भी पेश नहीं हुआ रेस्टोरेंट
इस मामले में अधिवक्ता अंकुर अग्रवाल और एडवोकेट अमित तोमर ने उपभोक्ता की ओर से पैरवी की। आयोग की तरफ से बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद रेस्टोरेंट का कोई प्रतिनिधि सुनवाई में शामिल नहीं हुआ।
ऐसे में आयोग ने उपलब्ध तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर एकपक्षीय फैसला सुनाया। इस आदेश के तहत रेस्टोरेंट पर कुल ₹1,06,000 की देनदारी तय की गई।
₹1 लाख वेलफेयर फंड में जमा करने का आदेश
आयोग ने रेस्टोरेंट को ₹1 लाख जिला उपभोक्ता वेलफेयर फंड में जमा करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा ₹5,000 अधिवक्ता फीस और ₹1,000 मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश भी दिया गया।
इस तरह पानी की बोतल पर केवल ₹2 अतिरिक्त वसूली से शुरू हुआ विवाद रेस्टोरेंट के लिए एक लाख रुपये से अधिक के आदेश तक पहुंच गया। यह मामला उपभोक्ताओं के अधिकारों और बिल में निर्धारित कीमत से अधिक वसूली के खिलाफ शिकायत करने के महत्व को भी सामने लाता है।