SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सत्ता में बदलाव की मांग करना किसी नागरिक का अपराध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार है। प्रशांत भूषण की यह टिप्पणी दिल्ली में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सामने आई।
गुरुवार को हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिनेता प्रकाश राज, नेहा बोरा और प्रशांत भूषण शामिल हुए। इस दौरान प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और हिरासत में लिए गए लोगों का मुद्दा भी उठाया गया।
‘रिजीम चेंज चाहना गलत नहीं’
प्रशांत भूषण ने कहा कि यदि सरकार को लगता है कि प्रदर्शनकारी सत्ता परिवर्तन चाहते हैं, तो इसमें गलत क्या है। उन्होंने तर्क दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को सरकार की नीतियों का विरोध करने और बदलाव की मांग करने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने भी पहले कई मौकों पर सत्ता और व्यवस्था में बदलाव के लिए आंदोलन किए हैं। ऐसे में विरोध करने वालों पर केवल इस आधार पर सवाल उठाना उचित नहीं है कि वे मौजूदा व्यवस्था में परिवर्तन चाहते हैं।
प्रशांत भूषण ने अपने बयान में देशद्रोह से जुड़े पुराने कानून का भी उल्लेख किया और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व रुख का हवाला दिया।
प्रदर्शन की जगह को लेकर भी उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत भूषण ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक, CJP और अन्य संगठन वहां प्रदर्शन करने के लिए जगह मांग रहे थे।
उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन को लगता था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या के लिए पर्याप्त जगह नहीं होगी, तो किसी वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था की जा सकती थी। इसके बजाय, उनके आरोप के अनुसार, मध्य दिल्ली के कई हिस्सों में प्रतिबंध लगाए गए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ मारपीट हुई।
प्रशांत भूषण ने प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को दबाने की कोशिशों से विरोध और बढ़ सकता है।
हिरासत में लिए गए CJP नेताओं का मामला उठाया
प्रशांत भूषण ने CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने पहुंचे दोनों नेताओं को पांच दिन की हिरासत में भेजा गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरी ओर, कनॉट प्लेस में लोगों के साथ मारपीट करने के आरोपी कुछ लोगों को जल्द रिहा कर दिया गया। प्रशांत भूषण ने इस अंतर को लेकर प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए और इसे अनुचित बताया।
SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर जारी है विवाद
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। इसी मुद्दे पर प्रदर्शनकारी समूह चुनाव प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर अपनी आपत्तियां उठा रहे हैं।
प्रशांत भूषण के बयान इसी विरोध और उससे जुड़े घटनाक्रम के बीच आए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए पुलिस कार्रवाई और हिरासत से संबंधित आरोपों को संबंधित पक्षों के बयानों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर अलग-अलग सत्यापित किया जाना चाहिए।