भारतीय संगीत जगत के लिए बेहद दुखद खबर सामने आई है। दक्षिण भारतीय सिनेमा की महान प्लेबैक सिंगर एस. जानकी का 88 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। अपनी मधुर आवाज और हजारों सदाबहार गीतों के जरिए करोड़ों संगीत प्रेमियों के दिलों में खास जगह बनाने वाली जानकी अम्मा के निधन से पूरे फिल्म और संगीत जगत में शोक की लहर है। दक्षिण भारत की 'नाइटिंगेल' और 'जानकी अम्मा' के नाम से लोकप्रिय एस. जानकी ने पांच दशक से अधिक लंबे करियर में तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और हिंदी सहित कई भारतीय भाषाओं में हजारों गीत गाए। उनकी आवाज ने भारतीय सिनेमा को अनगिनत यादगार गीत दिए।
मुख्यमंत्री ने जताया शोक
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने एस. जानकी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संगीत जगत ने अपनी सबसे महान आवाजों में से एक को खो दिया है। मुख्यमंत्री ने उनके परिवार, फिल्म इंडस्ट्री और दुनियाभर के प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की।
जब एस. जानकी ने ठुकराया था पद्म भूषण
साल 2013 में भारत सरकार ने एस. जानकी को देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित करने की घोषणा की थी। हालांकि उन्होंने यह सम्मान स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। जानकी का मानना था कि भारतीय संगीत में उनके दशकों लंबे योगदान को देखते हुए उन्हें बहुत पहले सम्मानित किया जाना चाहिए था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि इतनी लंबी सेवा के बाद देर से मिला सम्मान स्वीकार करना उचित नहीं होगा। उनके इस फैसले की देशभर में काफी चर्चा हुई थी।
पुरस्कारों से सजा शानदार करियर
एस. जानकी भारतीय संगीत जगत की सबसे सम्मानित गायिकाओं में शामिल थीं। उन्हें अपने शानदार करियर में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले।
उनकी प्रमुख उपलब्धियां—
4 बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
33 राज्य फिल्म पुरस्कार
कई लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान
हजारों सुपरहिट गीतों को अपनी आवाज दी
दक्षिण भारतीय संगीत की सबसे लोकप्रिय महिला आवाजों में शुमार
संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति
एस. जानकी सिर्फ एक गायिका नहीं थीं, बल्कि भारतीय संगीत की एक ऐसी पहचान थीं जिनकी आवाज पीढ़ियों तक याद रखी जाएगी। उनकी गायकी में भावनाओं की गहराई, सुरों की मिठास और अभिव्यक्ति की अद्भुत क्षमता थी। उनके निधन से भारतीय फिल्म संगीत का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया है। हालांकि उनके गीत हमेशा संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित रहेंगे।एस. जानकी का जाना भारतीय संगीत जगत के लिए ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उन्होंने अपनी अनूठी आवाज, सादगी और उत्कृष्ट गायकी से भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। आने वाली पीढ़ियां उन्हें एक महान कलाकार और संगीत की अमर विरासत के रूप में हमेशा याद रखेंगी।