उज्जैन : मध्य प्रदेश के उज्जैन में डोल ग्यारस पर बाबा काल भैरव की भव्य सवारी निकाली गई। यह सवारी मंगलवार शाम 04 बजे भैरवगढ़ स्थित काल भैरव मंदिर से रवाना की गई। लेकिन इसके पहले कलेक्टर और एसपी ने परंपरा के अनुसार सिंधिया परिवार की ओर से भगवान काल भैरव को पगड़ी धारण कराई गई। फिर पूजा अर्चना कर सवारी को आगे बढ़ाया। इस दौरान पूरे रास्ते पर बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी हुई नजर आई।
शाम चार बजे राजसी वैभव के साथ निकली सवारी
भगवान काल भैरव को बाबा महाकाल का सेनापति और उज्जैन का नगर कोतवाल माना जाता है। इसी परंपरा के तहत सवारी में सशस्त्र जवान, पुलिस बैंड, ढोल, ध्वज, घोड़े, बग्घी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। सवारी काल भैरव मंदिर से शुरू होकर जेल चौराहा, नाका चौराहा, माणक चौक, सिद्धवट और बृजपुरा होते हुए वापस मंदिर पहुंची।
पुलिस बल की ओर से दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर
काल भैरव की सवारी केंद्रीय जेल भैरवगढ़ पहुंची, जहां जेल प्रशासन ने बाबा के स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की थीं। जेल अधीक्षक मनोज साहू ने पालकी में विराजित बाबा काल भैरव का पूजन कर आरती की। जेल गेट पर पुलिस बल की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद जेल परिसर में मौजूद कैदियों ने बाबा के दर्शन किए।
कैदियों ने फूल बरसाकर बाबा का किया स्वागत
बाबा की सवारी के स्वागत के लिए केंद्रीय जेल के कैदियों ने पहले से रंगोली तैयार की थी। जैसे ही पालकी जेल परिसर में पहुंची, कैदियों ने फूल बरसाकर बाबा का स्वागत किया। इस दौरान कैदियों ने जयकारे लगाए, जबकि महिला कैदियों ने भजन प्रस्तुत किए। बाबा की एक झलक पाने के लिए कैदियों में खासा उत्साह नजर आया। पूजन के बाद सवारी शिप्रा तट स्थित सिद्धवट मंदिर के लिए रवाना हुई।
साल में दो बार निकलती है सवारी
भगवान कालभैरव को भगवान महाकाल का सेनापति और उज्जैन का कोतवाल माना जाता है। कालभैरव वर्ष में दो बार नगर भ्रमण पर निकलते हैं। पहली सवारी मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी पर भैरव जन्मोत्सव के अगले दिन तथा दूसरी भाद्रपद शुक्ल एकादशी यानी डोल ग्यारस पर निकाली जाती है।