प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन की सराहना की है। नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में मोहन भागवत ने राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के चरित्र को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार, 20 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर उनके संबोधन को प्रेरणादायी बताया।
पीएम मोदी ने अपने संदेश में सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति संघ के स्वयंसेवकों की प्रतिबद्धता का जिक्र किया। साथ ही उन्होंने RSS की पंच परिवर्तन अवधारणा को भी महत्वपूर्ण बताया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, इन विचारों के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और राष्ट्रीय विकास में योगदान देने की दिशा में काम किया जा सकता है।
मोहन भागवत के किन विचारों से प्रभावित हुए PM मोदी?
प्रधानमंत्री मोदी ने मोहन भागवत के संबोधन में उठाए गए कई विषयों को अहम बताया। इनमें देश की प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के चरित्र को मजबूत बनाने पर दिया गया जोर शामिल है।
पीएम मोदी ने सेवा की भावना को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए संघ के स्वयंसेवकों की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। उन्होंने पंच परिवर्तन के विचार को भी रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य समाज और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव को बढ़ावा देना है।
मोहन भागवत का विजयादशमी संबोधन RSS के प्रमुख वार्षिक कार्यक्रमों में शामिल है। इस अवसर पर संघ प्रमुख संगठन के कार्यकर्ताओं और समाज के सामने विभिन्न राष्ट्रीय और सामाजिक विषयों पर अपने विचार रखते हैं।
क्या है RSS की पंच परिवर्तन अवधारणा?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पंच परिवर्तन अवधारणा समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है। इसमें सामाजिक व्यवहार से लेकर पर्यावरण संरक्षण और नागरिक जिम्मेदारियों तक के विषय शामिल हैं।
1. सामाजिक समरसता: समाज में भेदभाव कम करने, समानता की भावना बढ़ाने और विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव मजबूत करने पर जोर दिया जाता है।
2. कुटुंब प्रबोधन: परिवार में संवाद, संस्कार, आपसी सहयोग और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने की बात कही जाती है।
3. पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति की रक्षा, संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को प्रोत्साहित करना इसका हिस्सा है।
4. स्वदेशी और स्वबोध: स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और अपनी पहचान के प्रति जागरूकता विकसित करने पर जोर दिया जाता है।
5. नागरिक अनुशासन: नागरिक कर्तव्यों का पालन करने, सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी निभाने और देश के प्रति अपने दायित्वों को समझने पर ध्यान दिया जाता है।
इस अवधारणा का व्यापक उद्देश्य व्यक्तिगत आचरण, पारिवारिक जीवन और सामाजिक व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना है। पीएम मोदी ने भी अपने संदेश में पंच परिवर्तन के जरिए समाज में सार्थक योगदान देने की बात को अहम बताया।
1925 में नागपुर में हुई थी RSS की स्थापना
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने वर्ष 1925 में नागपुर में विजयादशमी के दिन की थी। वर्ष 2025 में संगठन ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे किए। इसके बाद 2026 में भी शताब्दी वर्ष से जुड़े कार्यक्रमों और गतिविधियों का सिलसिला जारी रहा।
विजयादशमी का कार्यक्रम RSS के प्रमुख वार्षिक आयोजनों में से एक है। इस दौरान सरसंघचालक मोहन भागवत संगठन के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हैं और देश, समाज तथा संगठन से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखते हैं।
इस बार के संबोधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने मोहन भागवत के विचारों की सराहना करते हुए सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता, सेवा और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों को रेखांकित किया।
पीएम मोदी के संदेश में पंच परिवर्तन की अवधारणा भी प्रमुखता से सामने आई। इसके जरिए सामाजिक समरसता, परिवार, पर्यावरण, स्वदेशी और नागरिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर सकारात्मक बदलाव को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया।