ट्रेन में सफर के दौरान मोबाइल पर तेज आवाज में गाने सुनना, वीडियो देखना या रील चलाना दूसरे यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे मामलों को लेकर रेलवे यात्रियों को जागरूक करने पर जोर दे रहा है। यात्रियों से अपील की जा रही है कि वे मोबाइल पर ऑडियो या वीडियो चलाते समय ईयरफोन का इस्तेमाल करें और सहयात्रियों की सुविधा का ध्यान रखें।
सफर में दूसरों की परेशानी का बन सकता है कारण
ट्रेन में अलग-अलग उम्र और जरूरतों के यात्री सफर करते हैं। कोई आराम करना चाहता है, तो किसी को पढ़ना या काम करना होता है। ऐसे में मोबाइल के स्पीकर पर तेज आवाज में गाने बजाना, वीडियो देखना या सोशल मीडिया रील चलाना दूसरे यात्रियों की परेशानी बढ़ा सकता है।
रेल यात्रा के दौरान शोर-शराबे और अनुचित व्यवहार को रोकने के लिए यात्रियों को नियमों की जानकारी देना जरूरी माना जा रहा है। रेलवे की ओर से जागरूकता अभियान के जरिए लोगों को जिम्मेदारी से यात्रा करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
क्या तेज आवाज में मोबाइल चलाने पर जेल हो सकती है?
रेलवे अधिनियम की धारा 145 रेल परिसर में नशे, उपद्रव और अनुचित व्यवहार जैसे मामलों से संबंधित है। परिस्थितियों के आधार पर इस धारा के तहत कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, मोबाइल पर तेज आवाज में गाना या वीडियो चलाने के हर मामले में अपने आप इसी धारा के तहत जेल होने का दावा करना सही नहीं होगा। कार्रवाई मामले के तथ्यों और लागू नियमों पर निर्भर करेगी।
इसलिए यात्रियों को किसी विवाद में पड़ने के बजाय सफर के दौरान शांति बनाए रखनी चाहिए और रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
ट्रेन में सफर करते समय इन बातों का रखें ध्यान
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मोबाइल पर गाने, वीडियो या रील सुनने के लिए ईयरफोन का इस्तेमाल करें।
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रात के समय और सोने वाले यात्रियों के आसपास शोर करने से बचें।
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फोन पर बातचीत करते समय आवाज धीमी रखें।
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दूसरे यात्रियों से विवाद होने पर खुद कानून हाथ में न लें; जरूरत पड़ने पर रेलवे स्टाफ से मदद लें।
यात्रियों की सुविधा के लिए जरूरी है जिम्मेदारी
ट्रेन में सफर करना केवल अपनी सुविधा तक सीमित नहीं है। आसपास बैठे यात्रियों की निजता, आराम और शांति का सम्मान करना भी जरूरी है। मोबाइल का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सावधानी अपनाकर अनावश्यक विवाद से बचा जा सकता है और सभी के लिए यात्रा को बेहतर बनाया जा सकता है।