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नई ब्रांड की बिक्री नहीं हुई तो कंसल्टेंसी पर 80 लाख जुर्माना, कर्मचारियों की सैलरी से वसूली

नई ब्रांड की बिक्री नहीं हुई तो कंसल्टेंसी पर 80 लाख जुर्माना, कर्मचारियों की सैलरी से वसूली

रायपुर: शराब दुकानों में गैर-चर्चित और नए ब्रांड की बिक्री लक्ष्य के अनुसार नहीं होने पर आबकारी मुख्यालय ने वीआईएस कंसल्टेंसी एजेंसी के खिलाफ 80 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। आरोप है कि एजेंसी तय लक्ष्य के अनुसार शराब की बिक्री नहीं कर पाई। इसके बाद कंपनी ने इस जुर्माने की भरपाई अपने कर्मचारियों की सैलरी से करना शुरू कर दिया है।

कर्मचारियों की सैलरी से की जा रही वसूली

शराब दुकानों में कार्यरत सुपरवाइजर और सेल्समैनों ने बताया कि कंपनी ने उन्हें नवंबर से दिसंबर तक वेतन कटौती की चेतावनी दी थी। साथ ही यह भी कहा गया कि जो कर्मचारी सैलरी कटौती के लिए तैयार नहीं होंगे, उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा। इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

लक्ष्य के अनुरूप नहीं हो सकी बिक्री

आबकारी विभाग के अधिकारियों के अनुसार कंसल्टेंसी एजेंसी को शराब बिक्री का जो लक्ष्य दिया गया था, वह पूरा नहीं हो सका। इसी कारण एजेंसी पर 80 लाख रुपए का आर्थिक दंड लगाया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह एजेंसी की जिम्मेदारी थी कि मांग के अनुसार शराब की आपूर्ति सुनिश्चित करे।

अनजान ब्रांड भेजे जाने से घट रही बिक्री

शराब दुकानों के कर्मचारियों ने बताया कि वे ग्राहकों की मांग के अनुसार लोकप्रिय ब्रांड की सूची बनाकर कंसल्टेंसी एजेंसी को भेजते हैं, लेकिन इसके विपरीत ऐसे ब्रांड की सप्लाई कर दी जाती है, जिन्हें ग्राहक पहचानते तक नहीं। इसका सीधा असर बिक्री पर पड़ता है और ग्राहक मनपसंद ब्रांड न मिलने पर लौट जाते हैं।

जुर्माने से ज्यादा रकम की हो चुकी वसूली

जिले में कुल 77 अंग्रेजी शराब दुकानें संचालित हैं। प्रत्येक दुकान में एक सुपरवाइजर और औसतन 5–6 सेल्समैन तैनात हैं। इस तरह जिले में 450 से अधिक सेल्समैन कार्यरत हैं। जानकारी के अनुसार, नवंबर माह में कर्मचारियों की सैलरी से 40 लाख रुपए से अधिक की कटौती की गई दिसंबर में यह कटौती 41 लाख रुपए से ज्यादा पहुंच गई बताया गया कि सेल्समैन की मासिक सैलरी करीब 25 हजार रुपए और सुपरवाइजर की 36 हजार रुपए है।

कर्मचारियों ने उठाए सवाल

शराब दुकानों में कार्यरत कर्मियों का कहना है कि अगर ग्राहक को उसकी पसंद की शराब नहीं मिलती और वह बिना खरीदे लौट जाता है, तो इसमें उनकी क्या गलती है। एक सुपरवाइजर ने बताया कि वे नियमित रूप से मांग वाले ब्रांड की सूची बनाकर एजेंसी को भेजते हैं, लेकिन उसके बावजूद केवल करीब 25 प्रतिशत ब्रांड की ही आपूर्ति की जाती है।

 


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