मुकेश प्रजापति, भैरूंदा : चैत्र माह और नवरात्रि का पावन अवसर और आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है सीहोर जिले का सलकनपुर धाम, जहां विराजी हैं मां बिजासन देवी। मान्यता है कि यहां आने वाला हर भक्त खाली हाथ नहीं लौटता, मां के दरबार में हर मुराद पूरी होती है।
पहाड़ी पर विराजी मां
सलकनपुर की पहाड़ियों पर विराजी मां बिजासन देवी का यह धाम शक्ति का प्रमुख सिद्धपीठ माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार माता ने इसी स्थान पर महिषासुर राक्षस का वध कर धर्म की रक्षा की थी। नवरात्रि में यहां विशेष पूजन-अर्चन और अनुष्ठान होते हैं, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो जाता है।
बंजारों ने की थी स्थापना
मंदिर के पुजारी महंत महेश उपाध्याय के अनुसार करीब 300 साल पहले बंजारों ने इस मंदिर की स्थापना की थी। कहा जाता है कि उनके पशु गुम हो गए थे और माता की कृपा से वापस मिल गए। इस चमत्कार के बाद उन्होंने यहां मां का मंदिर बनवाया, जो आज विशाल और भव्य धाम बन चुका है।
मंदिर जाने के लिए 1400 सीढ़ियां
मंदिर तक पहुंचने के लिए तीन प्रमुख मार्ग हैं। लगभग 1400 सीढ़ियों वाला सीढ़ी मार्ग, सड़क मार्ग और आधुनिक रोपवे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल यात्रा कर माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। रास्ते में जगह-जगह भंडारे लगे रहते हैं, जहां भक्तों की सेवा की जाती है। कई श्रद्धालु अपनी मान्यता पूरी करने के लिए पहले उल्टे हाथ लगाकर और फिर दीवार पर सीधे हाथ रखते हुए ऊपर जाते हैं
पवित्र तालाब का महत्व
मंदिर के नीचे स्थित पवित्र तालाब का भी विशेष महत्व है। श्रद्धालु यहां स्नान कर शुद्ध होकर माता के दर्शन के लिए जाते हैं। समय के साथ सलकनपुर धाम अब “देवीलोक” का रूप लेता जा रहा है, जहां सुविधाएं लगातार बढ़ रही हैं। भोपाल से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित यह धाम आज मध्यप्रदेश के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है।
नवरात्रि के इस पावन पर्व पर सलकनपुर में आस्था, विश्वास और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है, जहां मां बिजासन देवी के दरबार में हर भक्त की झोली भरती है।