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MP Farmer Protest: मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं होने पर भड़के किसान, भोपाल मार्च से पहले पुलिस ने रोका, 40 से ज्यादा हिरासत में

MP Farmer Protest: मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं होने पर भड़के किसान, भोपाल मार्च से पहले पुलिस ने रोका, 40 से ज्यादा हिरासत में

भोपाल/नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश में किसानों का आंदोलन एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में हजारों किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात नहीं होने पर विरोध तेज कर दिया। किसानों का आरोप है कि तीन बार बैठक का समय तय होने के बावजूद हर बार उसे टाल दिया गया। इसके विरोध में नर्मदापुरम से भोपाल तक पैदल मार्च का ऐलान किया गया, लेकिन प्रशासन ने रास्ते में ही प्रदर्शनकारियों को रोकते हुए 40 से अधिक किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया।

किस वजह से भड़के किसान?

किसानों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह मूंग की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सीमित खरीदी है। केंद्र सरकार के मौजूदा नियमों के अनुसार तुअर, उड़द और मसूर जैसी फसलों की पूरी खरीदी की जा सकती है, जबकि मूंग की खरीदी अनुमानित उत्पादन के केवल 25 प्रतिशत तक सीमित रहती है। इस वर्ष मूंग का MSP ₹8,768 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, लेकिन अधिकांश किसानों को अपनी फसल खुले बाजार में ₹6,000 से ₹7,000 प्रति क्विंटल के बीच बेचनी पड़ रही है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

केंद्र और राज्य सरकार के बीच भी बना विवादमध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र से मूंग खरीदी की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने का आग्रह किया था। हालांकि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह मांग अस्वीकार कर दी। केंद्र का कहना है कि राज्य को पहले से स्वीकृत कोटे का भी बहुत कम उपयोग किया गया है। ऐसे में अतिरिक्त कोटा देने का औचित्य नहीं बनता। इसी मुद्दे को लेकर किसान संगठन राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा रहे हैं।

मुख्यमंत्री से मुलाकात तीन बार टली

संयुक्त किसान मोर्चा का दावा है कि मुख्यमंत्री से बातचीत के लिए कई बार समय तय किया गया, लेकिन हर बार अंतिम समय में कार्यक्रम बदल गया। किसान नेताओं का आरोप है कि अलग-अलग जिलों से भोपाल रवाना होने के बाद उन्हें सूचना मिली कि मुख्यमंत्री दिल्ली रवाना हो गए हैं। इससे किसानों में नाराजगी और बढ़ गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार उनकी समस्याएं सुनने के बजाय आंदोलन रोकने पर ज्यादा जोर दे रही है।

भोपाल मार्च से पहले पुलिस की सख्ती

भोपाल कूच की घोषणा के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। नर्मदापुरम, हरदा, इटारसी, डोलरिया, सिवनी मालवा और पिपरिया सहित कई इलाकों में बैरिकेडिंग कर किसानों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया। पुलिस ने 40 से अधिक किसान नेताओं को हिरासत में लिया, जबकि कई स्थानों पर नेताओं को नजरबंद भी किया गया। किसानों का आरोप है कि कई वाहनों को भी सीमा पर रोक दिया गया।

आंदोलन में दिखे अनोखे विरोध के तरीके

पुलिस कार्रवाई के बाद किसानों ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया।
सेठानी घाट पर सत्यनारायण भगवान की कथा आयोजित की गई।
कई स्थानों पर किसानों ने हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया।
कुछ जगहों पर दो मिनट का मौन रखकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया गया।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द वार्ता नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

अब आगे क्या होगा?

संयुक्त किसान मोर्चा के अनुसार पदयात्रा नर्मदापुरम से बुधनी, बरखेड़ा, ओबेदुल्लागंज और मंडीदीप होते हुए भोपाल पहुंचेगी। किसानों की योजना मुख्यमंत्री निवास तक मार्च निकालने की है। यदि सरकार बातचीत नहीं करती या मांगें नहीं मानती, तो भोपाल में चक्काजाम और रेल मार्ग बाधित करने जैसे बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

सरकार का पक्ष

इस पूरे मामले पर कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना से संपर्क करने का प्रयास किया गया। उनके कार्यालय की ओर से बताया गया कि मंत्री व्यस्त हैं। समाचार लिखे जाने तक इस मुद्दे पर सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।


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