नई दिल्ली। तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है, जिसमें उन्हें आरोपी के रूप में समन जारी किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट कानून के अनुरूप थी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का कोई आधार नहीं बनता।
CBI की क्लोजर रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत क्लोजर रिपोर्ट पर्याप्त तथ्यों और जांच के आधार पर तैयार की गई थी। अदालत ने माना कि ट्रायल कोर्ट के पास रिपोर्ट को खारिज कर समन जारी करने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार नहीं था। इसी वजह से समन आदेश को रद्द कर दिया गया।
क्या है तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक मामला?
यह मामला वर्ष 2005 में ओडिशा स्थित तालाबीरा-II (Talabira-II) कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा है। उस समय डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। मामले की जांच के दौरान CBI ने किसी भी प्रकार की आपराधिक साजिश या भ्रष्टाचार के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात कहते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।
2015 में जारी हुआ था समन
मार्च 2015 में विशेष अदालत (स्पेशल कोर्ट) ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट से असहमति जताते हुए डॉ. मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारख समेत अन्य लोगों को आरोपी के रूप में तलब किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी और अब अंतिम निर्णय में उसे पूरी तरह निरस्त कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्षों के आधार पर डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट ने समन जारी करते समय पर्याप्त कानूनी आधार स्थापित नहीं किया था।
मामले का कानूनी अध्याय समाप्त
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद इस बहुचर्चित कोयला आवंटन मामले में डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया समाप्त हो गई है। साथ ही CBI की क्लोजर रिपोर्ट को अंतिम वैधता मिल गई है, जिससे मामले पर लंबे समय से चल रहा कानूनी विवाद भी खत्म हो गया।