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शराब घोटाला केस: कवासी लखमा 379 दिन बाद आए जेल से बाहर, गांधी प्रतिमा पर किया माल्यार्पण, सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत...

शराब घोटाला केस: कवासी लखमा 379 दिन बाद आए जेल से बाहर, गांधी प्रतिमा पर किया माल्यार्पण, सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत...

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद बुधवार को 379 दिन बाद रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। जेल से बाहर आने पर उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। लखमा को लेने के लिए उनकी पत्नी सहित सुकमा-कोंटा क्षेत्र के समर्थक केंद्रीय जेल परिसर पहुंचे थे। इस दौरान कई कांग्रेस नेता और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिनमें विधायक विक्रम मंडावी, सावित्री मंडावी, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय, रायपुर ग्रामीण जिलाध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे और शहर अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन शामिल थे।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई हैं ये शर्तें:

अंतरिम जमानत देते समय सुप्रीम कोर्ट ने लखमा पर कई शर्तें लागू की हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा केवल कोर्ट पेशी के लिए राज्य में आने की अनुमति होगी। पासपोर्ट जमा कराना होगा, अपना पता और मोबाइल नंबर संबंधित थाने में दर्ज कराना अनिवार्य होगा।

जेल में मिलने पहुंचे थे दीपक बैज:

रिहाई से दो दिन पहले ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज रायपुर सेंट्रल जेल में लखमा से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने लखमा के स्वास्थ्य की जानकारी ली और मीडिया से कहा था कि उन्हें भरोसा है कि फरवरी में कोर्ट से राहत मिलेगी। बैज ने यह भी कहा था कि लखमा की रिहाई के बाद वे बस्तर सहित पूरे प्रदेश में कांग्रेस संगठन को मजबूत करेंगे।

‘आदिवासी नेता को टारगेट किया गया’- बैज

दीपक बैज ने आरोप लगाया कि एक आदिवासी नेता को राजनीतिक रूप से निशाना बनाकर जेल भेजा गया और यह कार्रवाई बदले की भावना से की गई। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर प्रदेशभर में आवाज उठाई जाएगी।

3,200 करोड़ रुपए से ज्यादा के शराब घोटाले की जांच

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से जुड़े कथित शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। एजेंसी के अनुसार यह मामला 3,200 करोड़ रुपए से अधिक के आर्थिक अनियमितताओं से जुड़ा है। FIR में राजनेताओं, आबकारी अधिकारियों और कारोबारियों के नाम शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि तत्कालीन कार्यकाल में कुछ अधिकारियों और कारोबारी नेटवर्क के माध्यम से कथित सिंडिकेट बनाकर घोटाले को अंजाम दिया गया।


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