जशपुर जिले में शुक्रवार को कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ के बैनर तले बड़ी संख्या में कोटवार एकजुट हुए और तहसील मुख्यालय में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण की मांग करते हुए शासन के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
नियमित कर्मचारी का दर्जा और 15 हजार रुपये मानदेय की मांग
धरना दे रहे कोटवारों ने सरकार से उन्हें नियमित कर्मचारी घोषित कर राजस्व विभाग में संविलियन करने की मांग की। साथ ही वर्तमान पारिश्रमिक में बढ़ोतरी करते हुए न्यूनतम 15 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय तय करने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि लंबे समय से जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सुविधाएं और आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल रही है।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और परिवार को प्राथमिकता की मांग
संगठन ने नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कथित भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की मांग उठाई। इसके अलावा सेवा दे रहे कोटवारों के परिवार के पात्र सदस्यों को नियुक्ति में प्राथमिकता देने की भी मांग की गई, ताकि वर्षों से इस कार्य से जुड़े परिवारों को रोजगार का अवसर मिल सके।
अनावश्यक कार्रवाई और बेगारी पर जताया विरोध
प्रदर्शन के दौरान कोटवारों ने आरोप लगाया कि कई बार बिना ठोस आधार के उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। उन्होंने ऐसे मामलों पर रोक लगाने की मांग की। साथ ही अधिकारियों द्वारा अनावश्यक बेगारी लिए जाने की शिकायत करते हुए शासन के पूर्व आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग भी रखी।
नगर निकायों में नियुक्ति प्रतिबंध हटाने की मांग
कोटवार संघ ने नगर पालिका और नगर निगम क्षेत्रों में कोटवारों की नियुक्ति पर लगे प्रतिबंध को समाप्त करने की भी मांग की। उनका कहना है कि इससे रोजगार के अवसर सीमित हो गए हैं और कई आवश्यक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
सरकार को दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
धरना समाप्त होने के बाद संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि सात सूत्रीय मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आगामी दिनों में जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। कोटवारों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।