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‘झीरम की पूरी साजिश का खुलासा हो, मुख्य साजिशकर्ताओं को भी मिले सजा’ : दिवंगत नेता महेंद्र कर्मा की बेटी तूलिका कर्मा से Exclusive बातचीत 

‘झीरम की पूरी साजिश का खुलासा हो, मुख्य साजिशकर्ताओं को भी मिले सजा’ : दिवंगत नेता महेंद्र कर्मा की बेटी तूलिका कर्मा से Exclusive बातचीत 

स्पर्श शर्मा// दिल्ली। झीरम घाटी हत्याकांड में 13 साल बाद NIA की विशेष अदालत ने 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। 25 मई 2013 को हुए इस हमले में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा को निशाना बनाया गया था। अदालत के फैसले के बाद अब इस मामले में मृतक कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा की बेटी तूलिका कर्मा ने INH न्यूज से एक्सक्लूसिव बातचीत में अपनी प्रतिक्रिया दी है।

तूलिका कर्मा ने कहा कि परिवार अदालत के फैसले का सम्मान करता है, लेकिन झीरम कांड की जांच को लेकर उनकी असहमति अब भी बनी हुई है। उनका कहना है कि मामले में केवल हमले को अंजाम देने वालों तक जांच सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसके पीछे की कथित बड़ी साजिश और मुख्य साजिशकर्ताओं की भूमिका भी सामने आनी चाहिए।

‘अदालत के फैसले का सम्मान, लेकिन जांच से सहमत नहीं’

तूलिका कर्मा ने INH न्यूज से बातचीत में कहा कि अदालत ने जो फैसला सुनाया है, परिवार उसका सम्मान करता है, क्योंकि यह न्यायपालिका का निर्णय है। हालांकि उन्होंने कहा कि जिस तरीके से पूरे मामले की जांच हुई, उससे परिवार संतुष्ट नहीं है।

उनके मुताबिक झीरम कांड की जांच का दायरा केवल उन लोगों तक सीमित नहीं होना चाहिए, जिन्हें अदालत ने दोषी ठहराया है। उनका कहना है कि इस हमले के पीछे जिन लोगों ने कथित तौर पर साजिश रची या मुख्य भूमिका निभाई, उनकी भूमिका भी सामने आनी चाहिए।

‘यह सिर्फ नक्सली हमला नहीं, राजनीतिक हत्या थी’

तूलिका कर्मा ने झीरम कांड को लेकर एक गंभीर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उनकी नजर में यह केवल नक्सलियों का हमला नहीं था, बल्कि एक राजनीतिक हत्या थी।

उन्होंने कहा कि 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा बस्तर के बेहद संवेदनशील नक्सल प्रभावित इलाके से गुजर रही थी। उस समय प्रदेश में बीजेपी की सरकार थी और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष तथा पार्टी के कई वरिष्ठ नेता एक ही काफिले में मौजूद थे।

तूलिका ने सवाल उठाया कि जब इतनी बड़ी राजनीतिक यात्रा की जानकारी पुलिस और प्रशासन को पहले से थी, तो सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए?

सुरक्षा व्यवस्था पर आज भी सवाल

तूलिका कर्मा के मुताबिक झीरम घाटी में इतना बड़ा हमला हुआ, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल आज भी जवाब मांग रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि इतनी बड़ी राजनीतिक यात्रा के लिए सुरक्षा का आकलन कैसे किया गया था और संवेदनशील इलाके में सुरक्षा व्यवस्था किस स्तर पर थी।

उनका सवाल है कि घटना से पहले उपलब्ध सुरक्षा इनपुट और यात्रा की जानकारी के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में क्या कमी रह गई।

‘जिन्होंने जिम्मेदारी लेने का दावा किया, उनकी भी जांच हो’

महेंद्र कर्मा की बेटी ने कहा कि झीरम कांड के बाद कुछ लोगों द्वारा इस हमले की जिम्मेदारी लेने या घटना में अपनी भूमिका का दावा किए जाने की बातें सामने आई थीं।

तूलिका ने कहा कि ऐसे दावों और संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए थी। उनका सवाल है कि जांच केवल निचले स्तर के आरोपियों तक ही क्यों पहुंची और कथित मुख्य साजिशकर्ताओं तक इसकी पहुंच क्यों नहीं हुई। उन्होंने कहा कि आज भी कुछ ऐसे लोगों को लेकर सवाल उठते हैं, जिन पर झीरम कांड से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

‘कानून सभी के लिए समान होना चाहिए’

तूलिका कर्मा ने कहा कि उनकी मांग किसी एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है। वह चाहती हैं कि झीरम कांड से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के मुताबिक कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि महेंद्र कर्मा और झीरम घाटी में मारे गए सभी लोगों को न्याय तभी मिलेगा, जब हमले के पीछे की पूरी साजिश का सच सामने आएगा।

10 दोषियों को मृत्युदंड

गौरतलब है कि 16 सितंबर 2026 को जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने झीरम घाटी हमले के मामले में दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने इन सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। मामले में कुल 11 आरोपी ट्रायल का सामना कर रहे थे, लेकिन सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई। NIA की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक झीरम घाटी हमले के मामले में एजेंसी ने 2014 में पहली चार्जशीट दाखिल की थी।

25 मई 2013 को हुआ था हमला

25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान माओवादियों ने काफिले पर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और सुरक्षा कर्मियों समेत बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी।

हालिया रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 27 से 29 के बीच अलग-अलग बताई गई है; NIA और अदालत से जुड़े स्रोतों में 29 मृतकों का उल्लेख भी किया गया है। इसलिए आंकड़े को लेकर विभिन्न रिपोर्टों में अंतर मौजूद है।

फैसले के बाद अब आगे क्या?

विशेष NIA अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। मृत्युदंड के मामलों में हाईकोर्ट की पुष्टि की प्रक्रिया आवश्यक होती है और दोषियों के पास फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने का कानूनी रास्ता भी मौजूद है।

ऐसे में झीरम घाटी मामले में अब अदालत के फैसले के साथ-साथ आगे की न्यायिक प्रक्रिया और तूलिका कर्मा समेत पीड़ित परिवारों की उस मांग पर भी नजर रहेगी, जिसमें वे हमले के पीछे की कथित व्यापक साजिश की पूरी जांच की मांग कर रहे हैं।


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