नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह भी तय किया जाना चाहिए कि हिंसा की जिम्मेदारी किसकी थी।
CJI ने बताई हिंसा की दो संभावित वजहें
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था, लेकिन बाद में हालात बिगड़ गए। उन्होंने कहा कि इसके पीछे दो संभावित कारण हो सकते हैं। पहला, पुलिस द्वारा जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया हो और दूसरा, प्रदर्शन में ऐसे तत्व शामिल हो गए हों जिन्होंने जानबूझकर हिंसा भड़काने की कोशिश की हो।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसे मामलों के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार किया जाता है तो भविष्य में जिम्मेदारी तय करना और जांच करना अधिक आसान होगा।
प्रोटोकॉल बनने से तय होगी जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों की भूमिका तय करने के लिए एक समान व्यवस्था आवश्यक है। अदालत का मानना है कि स्पष्ट दिशा-निर्देश होने से किसी भी विवाद की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।
याचिकाकर्ता के वकील ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि यदि कुछ लोग हिंसा में शामिल थे तो उनके खिलाफ अलग से एफआईआर दर्ज की जा सकती थी, लेकिन भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग अंतिम विकल्प होना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मी बिना वर्दी के मौजूद थे और उनके पास हथियार भी थे, जिन्होंने कथित तौर पर बल प्रयोग किया।
लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर उठे सवाल
गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया था और आंसू गैस के गोले भी छोड़े थे। इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिस पर सुनवाई जारी है।