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दुर्ग जिला संवाद कार्यक्रम 2026: जिले के विकास और समस्याओं की जमीनी हकीकत पर चर्चा... 

दुर्ग जिला संवाद कार्यक्रम 2026: जिले के विकास और समस्याओं की जमीनी हकीकत पर चर्चा... 

दुर्ग जिला संवाद कार्यक्रम 2026: दुर्ग में INH–हरिभूमि का जिला संवाद कार्यक्रम इस समय लाइव चल रहा है, जहां जिले की योजनाओं, विकास कार्यों और स्थानीय समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हो रही है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और नागरिक एक ही मंच पर मौजूद हैं। शासन की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन, विकास की वर्तमान स्थिति और लोगों को हो रही समस्याओं पर वक्ता अपने-अपने विचार रख रहे हैं।

शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग, सड़क, बिजली और पेयजल जैसे अहम मुद्दों पर लगातार संवाद जारी है। वहीं नागरिक सीधे सवाल और सुझाव रखकर जिले के विकास से जुड़े विषयों को सामने ला रहे हैं।

सोनल भारद्वाज : सरकार के दो साल, हम कहां तक पहुंचे...

आईपी मिश्रा, चेयरमैन, शंकराचार्य ग्रुप: सरकार के दो साल की बात करें तो सरकार ने काफी प्रयास किए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में, विशेषकर मेडिकल क्षेत्र में, सराहनीय कार्य हुआ है। शिक्षा में भी सरकार ने कई नवाचार किए हैं। कौशल विकास योजनाओं के तहत अच्छा काम हो रहा है, हालांकि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। सरकार के अभी तीन साल शेष हैं और मुझे लगता है कि तब तक वह अपने उद्देश्यों को प्राप्त कर लेगी।

प्रदेश के मुखिया विष्णु देव साय के नेतृत्व में शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय विकास हुआ है। पहले जहां प्रदेश में 5 मेडिकल कॉलेज थे, आज 14 सरकारी और 5 निजी मेडिकल कॉलेज हैं। हालांकि अभी भी विकास की आवश्यकता है। मेरा सरकार से अनुरोध है कि बच्चों को जो बुनियादी चीजें सीखनी चाहिए, वे सरकारी संस्थानों में तो मिल जाती हैं, लेकिन निजी संस्थानों में नहीं मिल पातीं। कम से कम मेडिकल कॉलेजों में इन बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

आईपी मिश्रा ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाल ही में आयुष्मान योजना की राशि 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख करने की घोषणा की है, जो बेहद सराहनीय कदम है। हमारे अस्पताल में 90 प्रतिशत इलाज आयुष्मान योजना के तहत होता है, लेकिन समय पर भुगतान न होने से पेंडिंग बढ़ जाती है, जिससे समस्याएं खड़ी होती हैं। इसके बावजूद मैं सरकार की सराहना करता हूं कि वह तेजी से आगे बढ़ रही है।

सोनल भारद्वाज : इन दो सालों को किस तरह देख रहे हैं, क्या उम्मीदें हैं?

डॉ. मनीष मनोरिया: जहां तक छत्तीसगढ़ सरकार का सवाल है, वर्ष 2024–25 में प्रदेश के मुखिया विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू करने के लिए प्रयास किए। आज यह देखकर खुशी होती है कि प्रदेश में करीब 7 सरकारी विश्वविद्यालय, 17 निजी विश्वविद्यालय, 335 सरकारी संस्थान और 331 निजी संस्थान हैं, जहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2022 लागू हो चुकी है।

यदि प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं की बात करें, तो पीएम श्री स्कूल योजना के तहत प्रदेश सरकार ने कुछ मॉडल स्कूल चिन्हित किए हैं, जहां आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एनईपी के तहत शिक्षा दी जा रही है। बच्चों को स्किल्ड बनाने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान भी एक सराहनीय पहल है, जिसका उद्देश्य डिग्री देने तक सीमित न रहकर बच्चों को आत्मनिर्भर और रोजगार योग्य बनाना है। इस दृष्टि से प्रदेश सरकार का दो वर्षों का कार्यकाल सराहनीय कहा जा सकता है।

सोनल भारद्वाज : उद्योग जगत को सरकार से क्या उम्मीदें हैं?

अरविंद सिंह खुराना, उद्योगपति: हमारी बीजेपी सरकार के दो साल पूरे हो चुके हैं। मैं मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, विधायक और सांसदों का धन्यवाद करता हूं कि वे उद्योगपतियों की समस्याओं को समझते हैं और सहयोग कर रहे हैं, ताकि उद्योग बंद न हों और चलते रहें। सभी जनप्रतिनिधि अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं।

उद्योगपतियों को चोर की नजर से न देखा जाए...

आज उद्योग कई स्तरों पर संघर्ष कर रहे हैं, खासकर छत्तीसगढ़ में। सरकार की उद्योग नीति को और बेहतर तथा व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए, विशेषकर पुराने उद्योगों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। लेबर की समस्या भी एक बड़ा मुद्दा है। लेबर लॉ लाना अच्छी बात है, लेकिन उद्योगपतियों को चोर की नजर से न देखा जाए। सरकार को यह समझना चाहिए कि उद्योग और श्रमिक दोनों साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहते हैं। लेबर लॉ दोनों पक्षों को ध्यान में रखकर बनाया जाना चाहिए।


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