डोंगरगढ़ | रिपोर्ट: राजा शर्मा: डोंगरगढ़ के रविदास नगर (मोची पारा) में अवैध शराब की सूचना पर कार्रवाई करने पहुंची पुलिस टीम को कथित तौर पर विरोध और घेराव का सामना करना पड़ा। घटनाक्रम के दौरान पुलिसकर्मियों और कुछ महिलाओं के बीच झूमाझटकी होने की बात भी सामने आई है। इस मामले से जुड़ा एक वीडियो वायरल होने की चर्चा है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
शराब की सूचना पर पहुंची थी पुलिस टीम
जानकारी के मुताबिक, कुछ दिन पहले अवैध शराब के कारोबार की सूचना मिलने के बाद देर रात पुलिसकर्मी कार्रवाई के लिए मोची पारा पहुंचे थे। इसी दौरान वार्ड के कुछ लोगों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों को घेर लिया। सूत्रों के अनुसार, मौके पर विवाद की स्थिति बनी और पुलिसकर्मियों तथा महिलाओं के बीच झूमाझटकी की बात सामने आई।
हालांकि, घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ, विवाद किस वजह से बढ़ा और इसमें कौन-कौन शामिल था, यह वायरल वीडियो की जांच तथा पुलिस के आधिकारिक बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अवैध शराब के कारोबार पर कार्रवाई को लेकर सवाल
इस घटना के बाद क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री और उसके खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों का आरोप है कि शराब बेचने वालों के खिलाफ शिकायत करने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती। यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि शिकायतकर्ताओं को कई बार निराश होकर लौटना पड़ता है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्षेत्र में अवैध शराब की शिकायतों पर पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की है और संबंधित मामलों में कितनी शिकायतें दर्ज हुई हैं।
वायरल वीडियो की जांच जरूरी
यदि वायरल वीडियो में पुलिसकर्मियों के साथ कथित अभद्रता या झूमाझटकी की पुष्टि होती है, तो मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जरूरत होगी। साथ ही, पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि मौके पर विवाद किन परिस्थितियों में शुरू हुआ और पुलिस टीम को किन हालात का सामना करना पड़ा।
थाना डोंगरगढ़ की भूमिका पर उठ रहे सवाल
इस मामले में थाना डोंगरगढ़ से जुड़े कई सवालों के जवाब मिलना बाकी हैं। क्या घटना के संबंध में कोई शिकायत या एफआईआर दर्ज की गई है? क्या वायरल वीडियो की जांच की जा रही है? क्या पुलिसकर्मियों के साथ कथित झूमाझटकी में शामिल लोगों की पहचान की गई है? और अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ क्षेत्र में क्या कार्रवाई हुई है?
फिलहाल, इन सवालों पर पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। किसी भी व्यक्ति को जांच और पुष्टि से पहले दोषी ठहराना उचित नहीं है। लेकिन घटना की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच और तथ्यों का सामने आना जरूरी है।