भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य में पहली बार राशन वितरण के लिए केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) आधारित डिजिटल टोकन प्रणाली लागू की जाएगी। इसकी शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में भोपाल और इंदौर से होगी, जहां पात्र हितग्राहियों को QR कोड स्कैन कर राशन प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। सरकार का उद्देश्य राशन वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना, फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगाना और खाद्यान्न वितरण में होने वाली गड़बड़ियों को खत्म करना है।
डिजिटल वॉलेट में मिलेगा राशन टोकन
नई व्यवस्था लागू होने के बाद पात्र लाभार्थियों के डिजिटल वॉलेट में हर महीने उनकी पात्रता के अनुसार डिजिटल टोकन भेजे जाएंगे। उचित मूल्य दुकान पर पहुंचने के बाद लाभार्थी अपने मोबाइल ऐप से दुकान पर उपलब्ध QR कोड स्कैन करेंगे। स्कैनिंग पूरी होते ही डिजिटल टोकन का उपयोग होगा और निर्धारित मात्रा में गेहूं, चावल तथा अन्य खाद्यान्न उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
ऐसे काम करेगी पूरी प्रक्रिया
इस योजना के तहत सबसे पहले लाभार्थियों के आधार कार्ड और राशन कार्ड का सत्यापन किया जाएगा। साथ ही मोबाइल नंबर का वेरिफिकेशन और ई-केवाईसी (e-KYC) अनिवार्य होगी। इसके बाद लाभार्थियों को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के डिजिटल रुपया मोबाइल ऐप से जोड़ा जाएगा। सभी उचित मूल्य दुकानों पर QR आधारित CBDC भुगतान प्रणाली स्थापित की जाएगी और दुकानदारों को नई तकनीक के संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
दिसंबर 2026 तक लागू करने का लक्ष्य
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी दी कि भारत सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भोपाल और इंदौर का चयन किया है। सरकार का लक्ष्य है कि दिसंबर 2026 तक दोनों शहरों की सभी उचित मूल्य दुकानों पर यह डिजिटल व्यवस्था पूरी तरह लागू कर दी जाए।
फर्जीवाड़े और लीकेज पर लगेगी रोक
सरकार का मानना है कि नई तकनीक से राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जी लाभार्थियों, डुप्लीकेट रिकॉर्ड तथा खाद्यान्न की कालाबाजारी जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। इसके अलावा सब्सिडी का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने में भी यह प्रणाली अधिक प्रभावी साबित होगी।
कई एजेंसियां मिलकर कर रही हैं तैयारी
इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, मध्य प्रदेश खाद्य विभाग, पंजाब नेशनल बैंक (PNB), राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) तथा अन्य तकनीकी एजेंसियां संयुक्त रूप से काम कर रही हैं। विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा चुकी है और कई दौर की बैठकों के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया है।
पूरे प्रदेश में लागू हो सकता है मॉडल
यदि भोपाल और इंदौर में शुरू किया जा रहा यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में इसे पूरे मध्य प्रदेश में लागू किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल रुपये आधारित यह मॉडल आगे चलकर अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में भी उपयोगी साबित हो सकता है।