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Delhi Pollution: दिल्ली में GRAP-1 की पाबंदियां लागू, AQI 233 पहुंचा; जानें क्या-क्या रहेगा प्रतिबंधित

Delhi Pollution: दिल्ली में GRAP-1 की पाबंदियां लागू, AQI 233 पहुंचा; जानें क्या-क्या रहेगा प्रतिबंधित

Delhi Air Pollution News: राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण की पाबंदियां लागू कर दी गई हैं। बुधवार सुबह दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 233 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए सड़कों की नियमित सफाई, धूल कम करने के लिए पानी का छिड़काव और निर्माण स्थलों की निगरानी जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

GRAP-1 के तहत प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण रखने के साथ ही धूल और कचरे के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया जाता है। इसके अलावा होटल और रेस्टोरेंट में कोयले के इस्तेमाल तथा डीजल जनरेटर के उपयोग को लेकर भी निर्धारित प्रतिबंध लागू होते हैं।

दिल्ली में AQI 233, खराब श्रेणी में हवा

दिल्ली में बुधवार सुबह नौ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 233 दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के अनुसार, 201 से 300 के बीच AQI को खराब श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे में राजधानी की हवा की गुणवत्ता लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए GRAP-1 के उपायों के तहत धूल के उत्सर्जन को कम करने और प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण रखने की कोशिश की जा रही है।

GRAP-1 के तहत क्या-क्या पाबंदियां लागू?

GRAP-1 का उद्देश्य प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रण के उपाय करना है। इसके तहत कई तरह के कदम उठाए जाते हैं।

  • सड़कों की सफाई: प्रमुख सड़कों की नियमित सफाई की जाती है, ताकि धूल का जमाव कम हो।

  • पानी का छिड़काव: धूल उड़ने से रोकने के लिए सड़कों और धूल प्रभावित क्षेत्रों में पानी का छिड़काव किया जाता है।

  • निर्माण स्थलों की निगरानी: निर्माण और तोड़फोड़ से होने वाले धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाता है।

  • कोयले के इस्तेमाल पर रोक: निर्धारित नियमों के तहत होटल और रेस्टोरेंट में कोयले तथा लकड़ी जैसे प्रदूषणकारी ईंधनों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जाता है।

  • डीजल जनरेटर पर नियंत्रण: डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर लागू नियमों का पालन कराया जाता है। कुछ निर्धारित परिस्थितियों में ही इनके उपयोग की अनुमति होती है।

  • कचरा प्रबंधन: खुले में कचरा जलाने जैसी गतिविधियों पर निगरानी रखी जाती है और कचरे का उचित निपटान सुनिश्चित किया जाता है।

इन उपायों का मकसद प्रदूषण के स्तर को और बढ़ने से रोकना तथा हवा की गुणवत्ता में सुधार लाना है।

दिल्ली में न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस

प्रदूषण के बीच राजधानी के तापमान में भी बदलाव दर्ज किया गया है। बुधवार को सफदरजंग मौसम केंद्र में न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह तापमान मौसम के औसत से कम रहा।

दिल्ली के अलग-अलग मौसम केंद्रों पर न्यूनतम तापमान की स्थिति इस प्रकार रही:

  • सफदरजंग: 18 डिग्री सेल्सियस

  • पालम: 17.8 डिग्री सेल्सियस, सामान्य से 1.1 डिग्री कम

  • लोधी रोड: 17.7 डिग्री सेल्सियस, सामान्य से 0.7 डिग्री अधिक

  • रिज: 19.1 डिग्री सेल्सियस, सामान्य से 0.4 डिग्री कम

  • आयानगर: 17.7 डिग्री सेल्सियस, सामान्य से 1.1 डिग्री कम

कितना AQI होने पर कौन-सी श्रेणी मानी जाती है?

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, वायु गुणवत्ता सूचकांक को छह श्रेणियों में बांटा गया है। AQI जितना अधिक होता है, वायु प्रदूषण का स्तर उतना ही ज्यादा माना जाता है।

  • 0 से 50: अच्छा

  • 51 से 100: संतोषजनक

  • 101 से 200: मध्यम

  • 201 से 300: खराब

  • 301 से 400: बहुत खराब

  • 401 से 500: गंभीर

दिल्ली में AQI 233 होने का मतलब है कि हवा खराब श्रेणी में है। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से प्रभावित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।


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