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महिलाओं ने दाल-चावल से बनाई राखियां, कलेक्टर-SP को बांधकर दिया आत्मनिर्भरता का संदेश

महिलाओं ने दाल-चावल से बनाई राखियां, कलेक्टर-SP को बांधकर दिया आत्मनिर्भरता का संदेश

बलौदाबाजार। रक्षाबंधन के अवसर पर बलौदाबाजार में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल देखने को मिली। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने दाल, चावल, सब्जियों के बीज, मोटे अनाज और अन्य स्थानीय सामग्रियों से आकर्षक हस्तनिर्मित राखियां तैयार कीं। इन अनोखी राखियों को महिलाओं ने जिले के कलेक्टर कुलदीप शर्मा और पुलिस अधीक्षक गौरव राय को बांधकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।

स्थानीय संसाधनों से तैयार हुईं आकर्षक राखियां

महिलाओं ने घर और गांव में आसानी से उपलब्ध दाल, चावल, बीज, अनाज तथा प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग कर सुंदर और पर्यावरण-अनुकूल राखियां तैयार कीं। कम लागत में तैयार इन राखियों ने यह साबित किया कि स्थानीय संसाधनों और रचनात्मक सोच के जरिए रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

स्टॉल बना लोगों के आकर्षण का केंद्र

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्टॉल पर प्रदर्शित विभिन्न डिजाइनों की राखियां लोगों का ध्यान आकर्षित करती रहीं। इन हस्तनिर्मित उत्पादों में महिलाओं की मेहनत, कला और नवाचार साफ दिखाई दिया। स्थानीय लोगों ने भी इन राखियों की सराहना करते हुए महिलाओं के प्रयासों की प्रशंसा की।

कलेक्टर ने बढ़ाया महिलाओं का उत्साह

कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने महिलाओं के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासन महिलाओं के उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने और उनके कौशल विकास के लिए हर संभव सहयोग करता रहेगा।

महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस का भरोसा

पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने महिलाओं को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि बलौदाबाजार पुलिस महिलाओं की सुरक्षा के लिए पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।

आत्मनिर्भर भारत का मजबूत संदेश

दाल, चावल और बीज जैसी सामान्य सामग्रियों से तैयार इन राखियों ने केवल भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक ही नहीं बनाया, बल्कि महिला उद्यमिता, स्थानीय उत्पादों के उपयोग और आत्मनिर्भर भारत की भावना को भी मजबूती से प्रस्तुत किया। यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई।


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