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सऊदी तेल हुआ महंगा तो पीछे हटा चीन, जून में घटाई रिकॉर्ड स्तर की खरीदारी...

सऊदी तेल हुआ महंगा तो पीछे हटा चीन, जून में घटाई रिकॉर्ड स्तर की खरीदारी...

China oil import news: दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल चीन ने जून 2026 के लिए सऊदी अरब से कच्चे तेल की खरीद में बड़ी कटौती कर दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और सऊदी अरब द्वारा अपेक्षा से कम राहत दिए जाने के बाद चीनी रिफाइनरियों ने अपने ऑर्डर घटा दिए हैं। व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, सरकारी ऊर्जा कंपनी Saudi Aramco जून महीने में चीन को करीब 1 करोड़ बैरल कच्चे तेल की सप्लाई करेगी। यह औसतन लगभग 3.33 लाख बैरल प्रतिदिन (BPD) के बराबर है, जो पिछले वर्षों की तुलना में बेहद कम माना जा रहा है। डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हाल के वर्षों में चीन द्वारा सऊदी अरब से खरीदे गए तेल का सबसे निचला स्तर है। साल 2025 में चीन को औसतन 13.9 लाख बैरल प्रतिदिन सऊदी तेल की सप्लाई हुई थी।

महंगे तेल से नाराज चीनी रिफाइनरियां

सूत्रों के मुताबिक, चीन की प्रमुख रिफाइनिंग कंपनियों Sinopec, Sinochem और Rongsheng Petrochemical ने जून के लिए अपने ऑर्डर में कटौती की है। दरअसल, चीनी कंपनियां सस्ते दामों पर तेल खरीदना चाहती थीं, लेकिन सऊदी अरब ने कीमतों में उतनी कमी नहीं की, जितनी बाजार उम्मीद कर रहा था। पिछले सप्ताह सऊदी अरब ने एशियाई ग्राहकों के लिए जून महीने के अरब लाइट क्रूड का आधिकारिक बिक्री मूल्य 15.50 डॉलर प्रति बैरल प्रीमियम तय किया था। हालांकि यह पिछले महीने के 19.50 डॉलर प्रीमियम से कम है, लेकिन चीन की रिफाइनरियां इससे भी कम कीमत चाहती थीं।

अमेरिका-ईरान तनाव का असर

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और कई देशों ने अपने आयात ऑर्डर कम कर दिए। इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट के जरिए होने वाली तेल सप्लाई भी प्रभावित हुई है। यही कारण है कि अप्रैल में चीन की सरकारी तेल कंपनियों ने अपने ऑपरेटिंग रेट कम कर दिए थे। युद्ध शुरू होने के बाद सऊदी अरब ने अपने कई तेल शिपमेंट्स को ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए लाल सागर के यानबू बंदरगाह की ओर मोड़ दिया था, जिससे सप्लाई चेन पर असर पड़ा।

एशियाई बाजार को मिल सकता है फायदा

एनर्जी मार्केट विश्लेषकों का कहना है कि चीन द्वारा कम ऑर्डर दिए जाने से एशिया के दूसरे देशों को फायदा मिल सकता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि अतिरिक्त तेल की खेप अब उत्तर-पूर्व एशिया के अन्य खरीदारों को भेजी जा सकती है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?

भारत भी सऊदी अरब के सबसे बड़े तेल खरीदारों में शामिल है। अप्रैल 2026 में रूस के बाद सऊदी अरब भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर रहा। भारत ने अप्रैल में सऊदी अरब से प्रतिदिन करीब 6.85 लाख बैरल तेल खरीदा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि चीन की मांग कमजोर बनी रहती है तो भारत समेत एशिया के अन्य देशों को बेहतर कीमतों पर तेल मिलने की संभावना बढ़ सकती है।


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