रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाला राज्योत्सव प्रदेश की कला, संस्कृति और लोक परंपराओं को सामने लाने का बड़ा मंच बनेगा। इस वर्ष 26वें राज्योत्सव का आयोजन 1, 2 और 3 नवंबर को नवा रायपुर के माना-तूता मेला स्थल पर किया जाएगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत, लोकनृत्य, पंथी, पंडवानी, सुवा नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों सहित कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्य मंच पर हर शाम छह बजे से कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। कार्यक्रम में प्रदेश के चर्चित गायकों के साथ विभिन्न विधाओं के लोक कलाकार भी हिस्सा लेंगे।
पहले दिन अनुराग शर्मा की आवाज से होगी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत
राज्योत्सव के पहले दिन, 1 नवंबर को लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी गायक अनुराग शर्मा मुख्य मंच पर प्रस्तुति देंगे। उनकी गायकी में छत्तीसगढ़ी लोकधुनों के साथ सूफी संगीत और माटी से जुड़े गीतों का रंग देखने को मिलेगा। उनकी प्रस्तुति के जरिए दर्शकों को प्रदेश की लोकसंस्कृति और संगीत की विविधता का अनुभव मिलेगा। राज्योत्सव के पहले दिन कई अन्य कलाकार भी लोकगीत, शास्त्रीय संगीत, नृत्य और लोकमंच की प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे।
सुनील सोनी के गीतों से सजेगी 2 नवंबर की शाम
राज्योत्सव के दूसरे दिन यानी 2 नवंबर को छत्तीसगढ़ी संगीत जगत के लोकप्रिय गायक सुनील सोनी अपनी प्रस्तुति देंगे। उनके सदाबहार और जोशीले गीत कार्यक्रम में संगीत प्रेमियों के लिए खास आकर्षण रहेंगे। दूसरे दिन लोकगीत-संगीत के साथ ओड़िशी और कथक नृत्य, सुवा नृत्य, सूफी संगीत तथा बैंड की प्रस्तुति भी होगी। अलग-अलग कला विधाओं के जरिए दर्शकों को विविध सांस्कृतिक परंपराओं से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।
पद्मश्री ऊषा बारले की प्रस्तुति के साथ होगा समापन
तीन दिवसीय राज्योत्सव का समापन 3 नवंबर को होगा। इस अवसर पर पद्मश्री सम्मानित लोक गायिका ऊषा बारले मुख्य मंच पर अपनी प्रस्तुति देंगी। पंथी और पारंपरिक लोकगीतों के माध्यम से वह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को मंच पर प्रस्तुत करेंगी। पंथी गायन और लोकपरंपराओं में विशेष पहचान रखने वाली ऊषा बारले की प्रस्तुति समापन दिवस के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगी। इसके साथ ही अन्य मंचों पर भजन, आदिवासी लोकसंगीत, नृत्य और नाटक का आयोजन भी किया जाएगा।
सात राज्यों की लोकसंस्कृति की झलक भी मिलेगी
राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ के कलाकारों के अलावा दक्षिण पूर्व मध्य सांस्कृतिक केंद्र से जुड़े राज्यों के कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इनमें महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और गोवा के कलाकार शामिल होंगे। इनकी प्रस्तुतियों के माध्यम से विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कला, लोकनृत्य और सांस्कृतिक विरासत को एक ही मंच पर देखने का अवसर मिलेगा। इससे राज्योत्सव में देश की विविध लोक परंपराओं की झलक भी देखने को मिलेगी।
120 लोक कलाकार तीन दिनों तक देंगे प्रस्तुतियां
आयोजन के दौरान मुख्य मंच के अतिरिक्त अन्य सांस्कृतिक मंचों पर भी कार्यक्रम होंगे। उपलब्ध कार्यक्रम विवरण के अनुसार, लगभग 120 लोक कलाकार तीन दिनों तक प्रतिदिन करीब 10 प्रस्तुतियां देंगे। इन कार्यक्रमों में पंडवानी, पंथी नृत्य, सुवा नृत्य, भरथरी, आदिवासी नृत्य-संगीत, लोकगीत, सूफी गजल, नाटक और लोकमंच जैसी विधाएं शामिल हैं। राज्योत्सव में आने वाले लोगों को इन प्रस्तुतियों के जरिए छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विविधता को करीब से देखने का मौका मिलेगा।
1 नवंबर को होने वाली प्रमुख प्रस्तुतियां
राज्योत्सव के पहले दिन विभिन्न सांस्कृतिक मंचों पर कई कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। कार्यक्रम विवरण में शामिल प्रमुख नाम हैं:
- शिवेंद्र मंडावी — लोकगीत-संगीत और गिटार वादन
- राजीव तिवारी और चेतन देवांगन — रिदम लाइव बैंड
- अनुष्का सुल्ताना — शास्त्रीय गीत-नृत्य
- रजनी रजक — लोकमंच ढोलामारू
- वंदिता साहू — लोकसंगीत
- पायल साहू — लोकमंच
- दुर्गा साहू — भरथरी और पंडवानी
2 नवंबर को इन कलाकारों की होगी प्रस्तुति
दूसरे दिन लोककला, शास्त्रीय नृत्य और आधुनिक संगीत की विविध प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी। प्रमुख कलाकारों में शामिल हैं:
- प्रसन्ना अवस्थी — लोकगीत-संगीत
- सुषमा दास — ओड़िशी नृत्य
- अंकित निर्मलकर — सूफी संगीत
- मिलवंतीन बाई एवं साथी — सुवा नृत्य
- मेघा घोष — लोकसंगीत
- आंचल पाण्डेय — कथक नृत्य
- रूखमणि दीवान — लोकमंच
- आदित्य मिश्रा — एनआईटी बैंड
- तेजराम साहू — लोकमंच
3 नवंबर को लोकनृत्य, भजन और नाटक का आकर्षण
राज्योत्सव के अंतिम दिन भी विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं के कार्यक्रम आयोजित होंगे। तीसरे दिन की सूची में शामिल प्रमुख प्रस्तुतियां इस प्रकार हैं:
- आस्था भट्ट — भजन गायन
- आरती बारले — पंथी नृत्य
- राकेश सेन — लोकमंच
- दिनेश जांगड़े — पंथी नृत्य
- अभिषेक सोनकर — आदिवासी लोकसंगीत और नृत्य
- सीवी वाचस्पति भारती — सूफी संगीत
- आनंद कुमार पांडे — नाटक मंचन
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को मिलेगा मंच
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश की लोकपरंपराओं, संगीत और कलात्मक विरासत को व्यापक पहचान दिलाने का अवसर भी बनेगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में स्थानीय कलाकारों के साथ अन्य राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। अनुराग शर्मा, सुनील सोनी और पद्मश्री ऊषा बारले की प्रस्तुतियों के साथ लोकनृत्य, पंडवानी, सूफी संगीत और नाटक का संगम राज्योत्सव को सांस्कृतिक रूप से विविध बनाएगा।