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सितंबर में भारत बनेगा वैश्विक कूटनीति का केंद्र, BRICS समिट में शामिल होंगे पुतिन और जिनपिंग...

सितंबर में भारत बनेगा वैश्विक कूटनीति का केंद्र, BRICS समिट में शामिल होंगे पुतिन और जिनपिंग...

BRICS Summit 2026: राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली सितंबर 2026 में वैश्विक कूटनीति का बड़ा केंद्र बनने जा रही है। भारत इस साल BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले इस दो दिवसीय सम्मेलन को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रूस ने पहले ही राष्ट्रपति पुतिन की मौजूदगी की पुष्टि कर दी है, जबकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी भारत आने की उम्मीद जताई जा रही है। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी Tass के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका स्थित रूसी दूतावास और रूसी अधिकारियों ने BRICS समिट में पुतिन की भागीदारी की पुष्टि की है।

2019 के बाद भारत आ सकते हैं शी जिनपिंग

अगर शी जिनपिंग इस सम्मेलन में शामिल होते हैं, तो यह अक्टूबर 2019 के बाद उनका पहला भारत दौरा होगा। इससे पहले उन्होंने तमिलनाडु के मामल्लापुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। भारत और चीन के संबंध जून 2020 की गलवान घाटी झड़प और दिसंबर 2022 में तवांग सीमा विवाद के बाद काफी तनावपूर्ण रहे हैं। हालांकि, रूस के कजान में आयोजित BRICS सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात ने रिश्तों में संवाद की नई शुरुआत के संकेत दिए थे। ऐसे में नई दिल्ली में संभावित मोदी-शी बैठक को एशियाई राजनीति और सीमा विवादों के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है।

वैश्विक तनाव के बीच अहम होगी BRICS बैठक

इस बार का BRICS सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब दुनिया कई भू-राजनीतिक संकटों से गुजर रही है। ईरान युद्ध, इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर BRICS देशों के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आए हैं। 24 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में BRICS देशों के उप विदेश मंत्रियों और विशेष दूतों की बैठक हुई थी, लेकिन सदस्य देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी। अमेरिका-ईरान तनाव, ईरान-UAE विवाद और इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे पर अलग-अलग रुख के कारण संयुक्त बयान जारी नहीं हो पाया था। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हालात में भारत की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। भारत न केवल BRICS देशों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगा, बल्कि तेजी से बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच समूह को एकजुट रखने की चुनौती भी संभालेगा।

भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका

जनवरी 2026 से भारत BRICS की अध्यक्षता संभाल रहा है। ऐसे में यह सम्मेलन भारत के लिए अपनी वैश्विक नेतृत्व क्षमता दिखाने का बड़ा अवसर माना जा रहा है। नई दिल्ली में होने वाली यह बैठक सिर्फ एक कूटनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच रणनीतिक संवाद का अहम मंच साबित हो सकती है। खासकर मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।


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