नई दिल्ली। भारतीय रक्षा उद्योग के लिए ब्रह्मोस मिसाइल अब वैश्विक निर्यात का एक अहम चेहरा बनती जा रही है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के मुताबिक ब्रह्मोस से जुड़े निर्यात का आंकड़ा 600 मिलियन डॉलर से अधिक हो चुका है। दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में भारतीय सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की मांग बढ़ने के साथ भारत की रक्षा निर्यात क्षमता भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई है। ब्रह्मोस भारत और रूस के संयुक्त विकास से तैयार की गई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली है। फिलीपींस इसका पहला विदेशी ग्राहक बना था। इसके बाद दक्षिण-पूर्व एशिया में वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ भी ब्रह्मोस को लेकर समझौतों और बातचीत ने भारत की रक्षा कूटनीति को नई दिशा दी है।
फिलीपींस से शुरू हुआ ब्रह्मोस का विदेशी सफर
फिलीपींस ब्रह्मोस मिसाइल का पहला विदेशी खरीदार रहा है। दोनों देशों के बीच करीब 375 मिलियन डॉलर का अनुबंध हुआ था। फिलीपींस को ब्रह्मोस की पहली खेप 2024 में मिली थी, जबकि दूसरी खेप अप्रैल 2025 में पहुंचाई गई। इस सौदे के बाद दक्षिण-पूर्व एशिया में ब्रह्मोस की संभावित मांग को लेकर भारत की रक्षा कंपनियों के लिए नए अवसर बने हैं। क्षेत्र में भारत की रक्षा साझेदारी बढ़ाने के प्रयासों में ब्रह्मोस को एक प्रमुख उत्पाद के तौर पर देखा जा रहा है।
वियतनाम के साथ ब्रह्मोस समझौता
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने मई 2026 में बताया था कि वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल की आपूर्ति को लेकर समझौता हो चुका है, हालांकि उस समय इसकी आधिकारिक सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई थी। रिपोर्टों के अनुसार इस समझौते का संभावित मूल्य करीब 60 अरब रुपये यानी लगभग 629 मिलियन डॉलर बताया गया था, जिसमें प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल हो सकते हैं। इस समझौते को भारत के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया में रक्षा निर्यात बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इंडोनेशिया के साथ भी बढ़ी रक्षा साझेदारी
इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस को लेकर भी भारत की बातचीत आगे बढ़ी है। मई 2026 में रक्षा सचिव ने बताया था कि इंडोनेशिया के साथ इसी तरह का समझौता अंतिम चरण में था। बाद की रिपोर्टों में ब्रह्मोस को भारत की उभरती रक्षा निर्यात कहानी के प्रमुख उत्पादों में शामिल किया गया है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में संभावित सौदे की रकम को लेकर अंतर दिखाई देता है। इसलिए आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी निश्चित राशि को अंतिम करार मूल्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर
ब्रह्मोस की सफलता ऐसे समय में सामने आई है जब भारत का कुल रक्षा निर्यात भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹23,622 करोड़ की तुलना में 62.66 प्रतिशत अधिक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारतीय रक्षा उत्पाद अब 80 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात में सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनियों का योगदान ₹21,071 करोड़ और निजी क्षेत्र का योगदान ₹17,353 करोड़ रहा।
रक्षा उत्पादन में भी भारत ने बनाया नया रिकॉर्ड
रक्षा निर्यात के साथ घरेलू रक्षा उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले वित्त वर्ष के ₹1.54 लाख करोड़ की तुलना में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि है। इस बढ़ते घरेलू उत्पादन और निर्यात क्षमता को भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण नीति और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी से भी जोड़ा जा रहा है।
ब्रह्मोस क्यों है भारत के लिए महत्वपूर्ण?
ब्रह्मोस भारत के रक्षा निर्यात पोर्टफोलियो में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उच्च तकनीक वाली मिसाइल प्रणाली है और इसकी अंतरराष्ट्रीय मांग भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करती है। रक्षा सचिव ने इसे भारत की उभरती रक्षा निर्यात कहानी का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया है। इस तरह ब्रह्मोस का विदेशी बाजार में विस्तार केवल एक मिसाइल प्रणाली की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के बढ़ते रक्षा औद्योगिक आधार, उत्पादन क्षमता और अंतरराष्ट्रीय रक्षा साझेदारियों का भी संकेत देता है।