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भोपाल में सफाईकर्मियों की हड़ताल से बिगड़ी व्यवस्था, कचरे के ढेर के बीच पेयजल संकट का खतरा

भोपाल में सफाईकर्मियों की हड़ताल से बिगड़ी व्यवस्था, कचरे के ढेर के बीच पेयजल संकट का खतरा

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नगर निगम कर्मचारियों की हड़ताल ने शहर की व्यवस्थाओं को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। लगातार दूसरे दिन जारी इस आंदोलन के कारण सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। घरों से कचरा उठाने का काम बंद होने से सड़कों, बाजारों और रिहायशी कॉलोनियों में कचरे के ढेर जमा होने लगे हैं। वहीं, जलप्रदाय विभाग के कर्मचारियों के भी आंदोलन में शामिल होने से अब लोगों के सामने पेयजल संकट की आशंका खड़ी हो गई है। नगर निगम के करीब 13 हजार कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन 10,500 रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करना, अनुकंपा नियुक्ति देना और अन्य लंबित मांगों का निराकरण शामिल है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा होने के बाद ही आंदोलन को लेकर अगला निर्णय लिया जाएगा।

400 से अधिक कचरा वाहन बंद, रोजाना 850 टन कचरा होता है जमा

कर्मचारियों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ा है। घरों से कचरा एकत्र करने वाली 400 से अधिक गाड़ियां फिलहाल गार्बेज स्टेशनों पर खड़ी हैं। सामान्य दिनों में ये वाहन प्रतिदिन दो से तीन चक्कर लगाकर शहर के अलग-अलग इलाकों से कचरा उठाते हैं। भोपाल में प्रतिदिन लगभग 850 टन कचरा निकलता है। इसे शहर के 17 गार्बेज स्टेशनों पर एकत्र करने के बाद कैप्सूल टैंकरों के माध्यम से आदमपुर छावनी स्थित कचरा निष्पादन केंद्र तक पहुंचाया जाता है। लेकिन दो दिनों से परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने के कारण कचरा घरों और सार्वजनिक स्थानों पर जमा होने लगा है। कई इलाकों में डस्टबिन भर चुके हैं और कचरा सड़कों तक फैलने लगा है।

2.30 लाख से ज्यादा नल कनेक्शन पर पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका

सफाई व्यवस्था के बाद अब जलप्रदाय विभाग पर भी हड़ताल का असर पड़ने की संभावना है। कर्मचारियों ने शुक्रवार से पानी की सप्लाई रोकने की चेतावनी दी है। राजधानी में 2.30 लाख से अधिक नल कनेक्शन हैं। ऐसे में यदि जलप्रदाय विभाग के कर्मचारी काम पर नहीं लौटते हैं, तो शहर के कई क्षेत्रों में पानी की नियमित आपूर्ति बाधित हो सकती है।
फिलहाल पेयजल सप्लाई बंद होने की आशंका के बीच नगर निगम के सामने इस व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की चुनौती है।

अटल भवन में भी ठप हुआ नगर निगम का कामकाज

हड़ताल का प्रभाव केवल सफाई और जलप्रदाय तक सीमित नहीं है। नगर निगम मुख्यालय अटल भवन में भी कार्यालयीन गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के आंदोलन में शामिल होने से विभिन्न विभागों का कामकाज रुक गया है। जानकारी के अनुसार, गुरुवार को कर्मचारी नेता अशोक वर्मा ने नगर निगम मुख्यालय की बिजली आपूर्ति बंद कर परिसर में ताला लगा दिया था। कर्मचारियों ने शुक्रवार को भी काम बंद रखने की बात कही है। इसका असर नगर निगम के सभी 85 वार्डों और 21 जोन में देखने को मिल रहा है।

भोपाल के साथ शिवपुरी और विदिशा में भी कर्मचारियों का प्रदर्शन

नगर निगम कर्मचारियों का यह आंदोलन राजधानी तक सीमित नहीं है। अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन (7262) के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के अनुसार, भोपाल में लगभग 7 हजार सफाईकर्मी और 6 हजार अन्य कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं। आंदोलन में कंप्यूटर ऑपरेटर, लिपिक, जलप्रदाय, अग्निशमन, भवन अनुज्ञा, अतिक्रमण, विद्युत, यांत्रिकी, उद्यान और योजना प्रकोष्ठ से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हैं। भोपाल के अलावा शिवपुरी और विदिशा सहित प्रदेश के अन्य शहरों में भी कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी है। शिवपुरी नगर पालिका के करीब 350 कर्मचारी आंदोलन में शामिल बताए जा रहे हैं। प्रदेशभर में एक लाख से अधिक कर्मचारी नियमितीकरण, वेतन वृद्धि और ठेका प्रथा समाप्त करने जैसी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं।

मुख्यमंत्री से बातचीत पर टिकी आंदोलन की अगली रणनीति

नगर निगम कर्मचारियों की हड़ताल के कारण राजधानी की बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ता जा रहा है। एक तरफ शहर में कचरा जमा होने से सफाई व्यवस्था प्रभावित है, तो दूसरी तरफ पानी की सप्लाई को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। अब सभी की नजरें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ होने वाली संभावित मुलाकात पर टिकी हैं। बातचीत के बाद ही हड़ताल समाप्त होने या आंदोलन को आगे बढ़ाने के संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


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