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बस्तर के नेताओं की सुरक्षा घटेगी या रहेगी बरकरार? गृहमंत्री विजय शर्मा ने दिए समीक्षा के संकेत

बस्तर के नेताओं की सुरक्षा घटेगी या रहेगी बरकरार? गृहमंत्री विजय शर्मा ने दिए समीक्षा के संकेत

रायपुर/जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सली गतिविधियों में आई भारी कमी के बाद अब राजनीतिक नेताओं और जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई गई सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा करने की तैयारी है। वर्तमान में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी विभिन्न जनप्रतिनिधियों और महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा में तैनात हैं। सरकार अब यह आकलन कर सकती है कि बदलती सुरक्षा परिस्थितियों में किन लोगों को पहले की तरह सुरक्षा की आवश्यकता है और कहां सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है। उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने संकेत दिए हैं कि बस्तर क्षेत्र की वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नेताओं की सुरक्षा का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। समीक्षा पूरी होने के बाद ही सुरक्षा कम करने, जारी रखने या आवश्यकतानुसार बदलाव करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

सभी नेताओं की सुरक्षा हटाने की योजना नहीं

सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा का अर्थ यह नहीं है कि सभी जनप्रतिनिधियों से सुरक्षा तत्काल वापस ले ली जाएगी। जिन नेताओं या जनप्रतिनिधियों के सामने अभी भी वास्तविक और गंभीर खतरे की संभावना होगी, उन्हें सुरक्षा मिलती रह सकती है। अधिकारियों के अनुसार, नक्सल विरोधी अभियानों और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की आवश्यकता बनी रहेगी। हालांकि, पहले नक्सली खतरे के कारण नेताओं को उपलब्ध कराए गए अतिरिक्त सुरक्षा घेरे का अलग-अलग मामलों में आकलन किया जा सकता है।

VIP सुरक्षा में तैनात हैं बड़ी संख्या में जवान

बस्तर संभाग लंबे समय तक नक्सली हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावित रहा है। इस दौरान राजनीतिक दलों के नेताओं, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोगों के खिलाफ खतरे की आशंका को देखते हुए बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। अब सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों और नक्सली नेटवर्क पर कार्रवाई के बाद क्षेत्र की परिस्थितियों में बदलाव आया है। ऐसे में सरकार उपलब्ध सुरक्षा संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी विचार कर सकती है। यदि कुछ मामलों में अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता कम पाई जाती है, तो वहां तैनात जवानों को कानून-व्यवस्था, नियमित पुलिस ड्यूटी और अन्य महत्वपूर्ण सुरक्षा अभियानों में लगाया जा सकता है।

चरणबद्ध तरीके से हो सकता है सुरक्षा का पुनर्मूल्यांकन

सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा समीक्षा में कई बिंदुओं को आधार बनाया जा सकता है। इनमें संबंधित व्यक्ति के खिलाफ वर्तमान खतरे का स्तर, उसकी राजनीतिक भूमिका, क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों की स्थिति, संवेदनशील इलाकों में आवाजाही और स्थानीय सुरक्षा परिस्थितियां शामिल हो सकती हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में सक्रिय रहने वाले नेताओं और जनप्रतिनिधियों के मामले में अलग-अलग खतरे के आकलन के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है। यानी सभी के लिए एक जैसी नीति लागू करने के बजाय व्यक्तिगत और क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर सुरक्षा व्यवस्था तय की जा सकती है।

बस्तर के कुछ नेताओं ने जताई चिंता

बस्तर क्षेत्र से जुड़े कुछ नेताओं का कहना है कि नक्सली गतिविधियों में कमी आने के बावजूद अंदरूनी और दूरस्थ इलाकों में सुरक्षा चुनौतियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। उनका मानना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार यात्रा करने वाले नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव से पहले जमीनी परिस्थितियों का गंभीरता से आकलन होना चाहिए। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और बीजापुर क्षेत्र से जुड़े जी. वेंकट ने सुरक्षा में संभावित कटौती को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में लगातार आवाजाही के कारण सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत बनी रह सकती है। वहीं कई अन्य जनप्रतिनिधियों ने कहा कि उन्हें सुरक्षा व्यवस्था में संभावित बदलाव के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।

खतरे के स्तर के आधार पर होगा फैसला

बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों में राजनीतिक नेताओं, पूर्व जनप्रतिनिधियों और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों को विभिन्न श्रेणियों में सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। अब प्रत्येक मामले में वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर खतरे का पुनर्मूल्यांकन किया जा सकता है। जिन लोगों के खिलाफ गंभीर खतरा बना रहेगा, उनकी सुरक्षा जारी रखी जा सकती है। वहीं जिन मामलों में पहले की तुलना में खतरे का स्तर काफी कम पाया जाएगा, वहां सुरक्षाकर्मियों की संख्या या सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव संभव है।

गृहमंत्री बोले- समीक्षा के बाद होगा निर्णय

उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा के अनुसार, बस्तर में बदली हुई सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। सरकार किसी भी प्रकार का अंतिम फैसला सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों के आकलन के बाद ही करेगी। सरकार का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करना नहीं, बल्कि वर्तमान खतरे और आवश्यकता के अनुरूप संसाधनों का उपयोग सुनिश्चित करना है।

कई राजनीतिक नेताओं को मिली हुई है सुरक्षा

बस्तर संभाग के सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कांकेर और अन्य क्षेत्रों के अनेक वर्तमान एवं पूर्व जनप्रतिनिधियों तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को सुरक्षा उपलब्ध है। इनमें भाजपा और कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक संगठनों से जुड़े नेता शामिल हैं। कर्मा परिवार के सदस्यों और बस्तर के कई वर्तमान व पूर्व विधायकों सहित अन्य नेताओं को भी अलग-अलग श्रेणियों में सुरक्षा दी गई है। अब प्रस्तावित समीक्षा के बाद प्रत्येक व्यक्ति की वर्तमान सुरक्षा आवश्यकता का अलग-अलग आकलन किया जा सकता है।

क्या बदलेगी छत्तीसगढ़ की VIP सुरक्षा व्यवस्था?

बस्तर में सुरक्षा स्थिति में आए बदलाव के बाद VIP सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे एक ओर सुरक्षा बलों की उपलब्धता बढ़ सकती है, वहीं दूसरी ओर वास्तविक खतरे वाले लोगों को जरूरत के अनुसार सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सकेगी। हालांकि अंतिम निर्णय पूरी तरह सुरक्षा समीक्षा और खतरे के आकलन पर निर्भर करेगा। सरकार ने फिलहाल यह स्पष्ट किया है कि किसी भी नेता की सुरक्षा में बदलाव का फैसला बिना समीक्षा के नहीं किया जाएगा।


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