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दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, एब्सोल्यूट वोदका और शिवास रीगल पर बैन बरकरार

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, एब्सोल्यूट वोदका और शिवास रीगल पर बैन बरकरार

दिल्ली में एब्सोल्यूट वोदका और शिवास रीगल जैसे प्रीमियम शराब ब्रांडों की बिक्री पर लगी रोक जारी रहेगी। दिल्ली हाई कोर्ट ने फ्रांस की प्रमुख कंपनी पेरनोड रिकार्ड की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने अपने उत्पादों की बिक्री की अनुमति देने की मांग की थी। कंपनी 2021 की दिल्ली शराब नीति से जुड़े विवाद और जांच के चलते 2023 से राजधानी के बाजार से बाहर है।

शराब नीति जांच और ED के आरोप बने वजह

कंपनी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों को देखते हुए प्रशासन ने लाइसेंस आवेदन को पहले ही अस्वीकार कर दिया था। आरोप है कि पेरनोड रिकार्ड ने 2021 की आबकारी नीति के दौरान रिटेलर्स के साथ मिलकर अपने बाजार हिस्से को अनुचित तरीके से बढ़ाने की कोशिश की थी। इसी जांच के चलते कंपनी के कारोबार पर दिल्ली में रोक लगी हुई है।

टैक्स और इम्पोर्ट विवाद में भी फंसी कंपनी

शराब नीति विवाद के अलावा कंपनी भारत में टैक्स और कस्टम ड्यूटी से जुड़े बड़े मामले का भी सामना कर रही है। जांच एजेंसियों का दावा है कि कंपनी ने स्कॉच व्हिस्की के आयात के दौरान उत्पाद की उम्र और संरचना से जुड़ी जानकारी छिपाई, जिससे आयात मूल्य कम दिखाकर टैक्स बचाने की कोशिश की गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में कंपनी पर लगभग 2,996 करोड़ रुपये के बकाया टैक्स का दावा किया गया है। आरोप यह भी है कि कस्टम जांच को भ्रमित करने के लिए कंपनी ने अलग-अलग कोडनेम का इस्तेमाल किया और आयातित सामग्री की वास्तविक जानकारी स्पष्ट नहीं की।

मूल्य कम दिखाकर टैरिफ से बचने का आरोप

जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी ने अपने बल्क स्कॉच कंसंट्रेट की कीमत को काफी कम दिखाया, जिससे 150 प्रतिशत तक लगने वाले कस्टम टैरिफ से बचा जा सके। इसी कंसंट्रेट का इस्तेमाल बाद में भारत में कई लोकप्रिय व्हिस्की ब्रांड तैयार करने में किया जाता है।

कंपनी ने आरोपों को बताया निराधार

पेरनोड रिकार्ड इंडिया ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसने हर स्तर पर नियमों का पालन किया है और वह कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रख रही है। वहीं, यदि कंपनी यह मामला हारती है तो उसे भारी जुर्माने के साथ हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है।

बाजार पर बड़ा असर, कानूनी लड़ाई जारी

भारत कंपनी के लिए सबसे बड़ा बाजार माना जाता है और दिल्ली उसकी बिक्री का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है और सभी पक्षों की दलीलों के बाद ही अंतिम फैसला आने की संभावना है।


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